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भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटिंग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में आज देश का राष्ट्रपति चुनने के लिए ऐतिहासिक चुनाव हो रहा है. देश के इस पहले बड़े लोकतांत्रिक चुनाव में हिस्सा लेने के लिए एक करोड़ से भी अधिक मतदाताओं ने अपने नाम दर्ज करवाए हैं. आरंभिक ख़बरों के अनुसार मतदाता बढ़-चढ़कर मत डालने आ रहे हैं. मतदान के लिए पूरे अफ़ग़ानिस्तान में 25000 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. मगर मतदान सबसे पहले पाकिस्तान में शुरू हुआ जहाँ अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए मतदान का इंतज़ाम किया गया है. ऐसा ही प्रबंध ईरान में रह रहे अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए भी किया गया है. पाकिस्तान में लगभग 7,40,000 अफ़ग़ान मतदाता और ईरान में लगभग 6,00,000 अफ़ग़ान मतदाता ऐसे हैं जो शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. राष्ट्रपति पद की दौड़ में अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई का पलड़ा भारी है. दो उम्मीदवारों ने करज़ई का समर्थन करते हुए चुनाव से हटने की घोषणा कर दी है जिसके बाद चुनाव में 16 उम्मीदवार रह गए हैं. चुनाव में एक महिला उम्मीदवार भी मैदान में है. सुरक्षा
अफ़ग़ानिस्तान के चुनाव में किसी तरह की अप्रिय घटना को टालने के लिए सुरक्षा के ज़बरदस्त इंतज़ाम किए गए हैं. स्थानीय सुरक्षाबलों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षाकर्मियों को मिलाकर एक लाख से भी अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता से बेदखल कर दिए गए तालेबान के सदस्यों ने चुनाव में बाधा डालने की धमकी दी है. शुक्रवार को दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के शहर कंदहार में सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में विस्फोटकों से लदे एक तेल के टैंकर को पकड़ा. शुक्रवार को ही राजधानी काबुल में अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक सेना के मुख्यालय के पास एक रॉकेट से हमला किया गया. जलालाबाद शहर में भी रॉकेट हमले हुए. अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता और चुनाव के दौरान सुरक्षा प्रदान करने के लिए इस समय वहाँ उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) के क़रीब 9,000 सैनिक मौजूद हैं. अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के भी 18,000 सैनिक मौजूद हैं. |
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