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शनिवार, 25 सितंबर, 2004 को 18:58 GMT तक के समाचार
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'पाक सेना मानवाधिकार हनन कर रही है'
सैनिक
पाकिस्तानी सैनिक दक्षिणी वज़ीरिस्तान में लगातार कार्रवाई कर रहे हैं
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने पाकिस्तानी सेना पर क़बायली इलाक़े वजीरिस्तान में मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया है.

सेना पिछले छह महीने से अफगानिस्तान सीमा से लगे इस इलाके में अल क़ायदा से जुड़े चरमपंथियों के ख़िलाफ अभियान चला रही है.

हाल में पाकिस्तानी सेना ने दक्षिणी वज़ीरिस्तान में विदेशी चरमपंथियों के एक प्रशिक्षण केंद्र को नष्ट करने का दावा किया था.

सेना के अनुसार कार्रवाई में 50 चरमपंथी मारे गए जिनमें ज़्यादातर विदेशी थे.

इलाक़े को पूरी तरह सील कर दिया गया है.

 इस समस्या के मानवाधिकार पक्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. हमारी रिपोर्टों के अनुसार 50 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं लेकिन सरकार की ओर से कुछ नहीं किया गया है
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग

मानवाधिकार आयोग ने इन इलाक़ों में जाने की अनुमति मांगी है. आयोग का कहना है कि उस क्षेत्र में सेना का रवैया आम लोगों के साथ ठीक नहीं है.

सेना का जवाब

इन आरोपों के जवाब में सेना का कहना है कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान में उनके अभियानों में 150 से अधिक चरमपंथी मारे जा चुके हैं.

क्षेत्र के डिवीजनल कमांडर मेजर जनरल नियाज़ खटक ने पत्रकारों को बताया कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सोच समझकर नपे-तुले हमले किए गए हैं ताकि आम लोगों को कम से कम नुक़सान हो.

उनका कहना है कि क्षेत्र के विद्रोही नेताओं ने चरमपंथियों को शरण दे रखी है.

मानवाधिकार आयोग के अफ़रासियाब खटक ने बीबीसी से कहा, "इस समस्या के मानवाधिकार पक्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. हमारी रिपोर्टों के अनुसार 50 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं लेकिन सरकार की ओर से कुछ नहीं किया गया है."

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मीडिया के अधिकारों पर नज़र रखने वाली संस्था 'रिपोर्टर्स सैंस फ्रंटियर्स' ने दक्षिणी वज़ीरिस्तान में पत्रकारों को नहीं जाने देने के सरकार के फ़ैसले की निंदा की है.

पाकिस्तानी सेना कुछ दिन पहले विदेशी और स्थानीय पत्रकारों के एक दल को इस क्षेत्र में ले गई थी.

डिवीजनल कमांडर खटक के अनुसार शांति चाहने वाले लोगों ने सेना का स्वागत किया है लेकिन मानवाधिकार आयोग को इस पर शक है.

मानवाधिकार आयोग के अफरासियाब खटक का कहना है कि सरकार की बात पर विश्वास करना मुश्किल है. मार्च महीने में अभियान शुरु हुआ है अब भी ख़त्म होता नहीं दिखता.

वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस ओर ध्यान देने की अपील करते हैं और कहते हैं कि 'आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई के नाम पर सरकार को बेक़सूर लोगों की हत्या करने का लाइसेंस' मिल गया है.

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