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विद्रोही क़बायली नेता की 'हत्या' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तानी सेना का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के निकट हो रही कार्रवाई में एक 'विद्रोही' क़बायली नेता नेक मोहम्मद मारे गए हैं. नेक मोहम्मद पर अल-क़ायदा के चरमपंथियों को शरण देने का आरोप है और उन्होंने दक्षिणी वज़ीरिस्तान में सेना पर कथित रूप से कुछ हमले भी करवाए हैं. सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल शौकत सुल्तान ने इस्लामाबाद से इसकी जानकारी देते हुए कहा, "हम उनका पीछा कर रहे थे और वह गुरुवार को हमारे हाथों मारे गए." बताया जा रहा है कि मोहम्मद उस समय एक अन्य क़बायली नेता शेर ज़माँ के साथ थे. वहाँ के नागरिकों के हवाले से एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेंसी का कहना है कि इस हमले में ज़माँ का एक लड़का, एक पोता और मोहम्मद का एक सहयोगी भी मारे गए हैं. ये कार्रवाई दक्षिणी वज़ीरिस्तान के मुख्य शहर वाना के पश्चिम में हुई. सेना के विरुद्ध संघर्ष मार्च में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ जो संघर्ष हुए थे उसमें भी मोहम्मद के शामिल होने की बात कही जा रही थी. उस संघर्ष में लगभग 100 लोग मारे गए थे. उन पर आरोप थे कि वह विदेशी चरमपंथियों को संरक्षण दे रहे हैं और सेना के काफ़ी कहने के बाद भी उन्हें वह सेना के सुपुर्द नहीं कर रहे थे. इसके बजाए उनके नेतृत्व में लोग सेना के विरुद्ध हमले कर रहे थे. इन हमलावरों का कहना है कि सेना उनके विरुद्ध अमरीकी सेना की ओर से अभियान चला रही है. इस बारे में बातचीत चल भी रही थी मगर बातचीत टूटने के बाद पाकिस्तानी सेना ने हमले तेज़ कर दिए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार को चरमपंथियों के संदिग्ध ठिकानों पर रॉकेटों से हमले किए गए. सैनिक अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले रविवार को भी इसी संबंध में हमले किए गए थे जिसमें 72 लोग मारे गए थे. उनमें से भी 17 पाकिस्तानी सैनिक थे. पेशावर में मौजूद बीबीसी संवाददाता रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई का कहना है कि ये कार्रवाइयाँ काफ़ी अहम हैं क्योंकि ये उन पहाड़ी इलाक़ों में हो रही हैं जो विदेशी चरमपंथियों का गढ़ माना जाता है. |
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