| मदरसे विदेशी समर्थन की तरफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के एक प्रतिष्ठित मदरसे ने देश के मदरसों में विदेशी छात्रों पर लगी रोक हटाने के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते विदेशी राजनयिकों की तरफ़ रुख़ किया है. कराची के जामिया बिनोरिया मदरसे ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान में तमाम विदेशी राजनयिकों को इस धार्मिक संस्था का दौरा करने का अनुरोध किया गया है. इस मदरसे का कहना है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ विदेशी छात्रों पर लगाई गई रोक लगाने के अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करें. इन ख़बरों के बाद मदरसे चर्चा के केंद्र में आ गए थे कि लंदन में सात जुलाई को हुए धमाकों के एक संदिग्ध हमलावर ने पाकिस्तान के किसी मदरसे में पढ़ाई की थी. कराची के जामिया बिनोरिया मदरसे में क़रीब 100 विदेशी छात्र पढ़ते हैं जिनमें से ज़्यादातर यूरोप और अमरीका के हैं. इस मदरसे के प्रमुख मुफ़्ती नईम ने बीबीसी से कहा, "हम उन छात्रों की शिक्षा पूरी करने में मदद के लिए जो कुछ कर सकते हैं, करेंगे. लेकिन अगर सरकार कहती है कि उसका फ़ैसला अंतिम है तो कुछ नहीं किया जा सकेगा." मदरसों के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सरकार के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए शरीफ़ुद्दीन पीरज़ादा नाम के एक नामी वकील से भी संपर्क किया है.
मुफ़्ती नईम ने कहा कि विदेशी छात्र सरकार के इस फ़ैसले से अभी सदमे की स्थिति में हैं, "पिछले कुछ दिन हमारे लिए किसी जहन्नुम की तरह रहे हैं." मुफ़्ती नईम का कहना था, "हमारा दिन मीडिया के सवालों का जवाब देने में कटता है और रातें पश्चिमी देशों के छात्रों के चिंतित अभिभावकों के प्रश्नों का जवाब देने में गुज़रती है. अभिभावक जानना चाहते हैं कि उनके बच्चों का क्या भविष्य है." मुफ़्ती नईम का कहना था कि छात्र अपनी शिक्षा बीच में नहीं छोड़ने के लिए संकल्पबद्द हैं. उन्होंने कहा है कि उन्हें सबसे ज़्यादा डर इस बात का है कि उनमें से बहुत से छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए भारत का रुख़ कर सकते हैं. मुफ़्ती नईम का कहना था, "भला इससे पाकिस्तान के बारे में क्या राय बनेगी. क्या हम चाहते हैं कि मुसलमान इस्लाम का अध्ययन करने के लिए पाकिस्तान के बजाय भारत जाएँ." अंतरराष्ट्रीय छवि कराची के जामिया बिनोरिया मदरसे की अंतरराष्ट्रीय छवि रही है और इसके प्रमुख होने के नाते मुफ़्ती नईम देश के असरदार मदरसा नेता हैं.
इस मदरसे में बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र आते रहे हैं लेकिन सितंबर 2001 में अमरीका पर हुए हमले के बाद से इस संख्या में कमी आई है. इस मदरसे में इस वक़्त क़रीब 3000 छात्र और 500 छात्राएँ हैं. मुफ़्ती नईम का कहना था, "हमारे मदरसे में अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और बहुत से पश्चिमी देशों और सुदूर पूर्वी देशों से छात्र पढ़ाई करने आते हैं." सिंध प्रांत में सभी मदरसा नेताओं से कहा गया था कि वे प्रदेश के गृह सचिव ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) ग़ुलाम मोहतरिम से मुलाक़ात करें. इस बैठक में भाग लेने वाले एक नेता ने बीबीसी को बताया, "उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विदेशी छात्र जितना जल्दी हो सकें, बाहर हो जाएँ." "जिस तरह से वह बात कर रहे थे उससे लगता है कि सरकार 24 घंटें के भीतर विदेशी छात्रों को मदरसों से बाहर देखना चाहती है." मदरसा नेताओं को एक फ़ॉर्म दिया गया है जिसमें उनसे हर एक छात्र का व्यक्तिगत विवरण गुरूवार तक भरने को कहा गया है. सूत्रों का कहना है कि सरकार ने विदेशी छात्रों को उनके देश भेजने के लिए विशेष विमान भी मुहैया कराने की पेशकश की है. |
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