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पाकिस्तान में धार्मिक गुटों का प्रदर्शन
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धार्मिक कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदर्शन किए लेकिन आम लोग उनसे दूर रहे
पाकिस्तान में पिछले दिनों लंदन बम धमाकों के बाद संदिग्ध चरमपंथियों की धर-पकड़ के लिए जारी कार्रवाई के विरोध में लगभग 2000 धार्मिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए हैं.

शुक्रवार को इस्लामाबाद और कुछ अन्य शहरों में इस्लामिक पार्टियों ने रैलियाँ कीं.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके जिन साथियों को पिछले दिनों गिरफ़्तार किया गया है उनको रिहा किया जाए.

पाकिस्तानी पुलिस ने सात जुलाई को लंदन में हुए बम धमाकों के बाद इस सप्ताह लगभग 200 लोगों को गिरफ़्तार किया है जिनमें कई लोग मदरसों पर मारे गए छापों में पकड़े गए थे.

लेकिन पाकिस्तान से संवाददाताओं का कहना है आम लोग इस्लामिक पार्टियों की रैलियों से दूर ही रहे जो इस बात का संकेत हैं कि धार्मिक पार्टियों के आह्वान को अधिक समर्थन नहीं मिला है.

शुक्रवार को इस्लामाबाद में लगभग 1000 लोग प्रदर्शन करने निकले जिन्होंने परवेज़ मुशर्रफ़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के ख़िलाफ़ नारे लगाए गए.

कराची में कुछ सौ लोगों ने प्रदर्शन किया जबकि लाहौर, पेशावर और क्वेटा में ऐसे ही छोटे प्रदर्शन हुए.

पाकिस्तान में छह विपक्षी पार्टियों के गुट मुत्तहिदा मजलिसे अमल यानी एमएमए के प्रवक्ता शाहिद शम्सी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा,"हम अमरीका और पश्चिमी देशों को खुश करने के लिए मदरसों और मस्जिदों पर मारे जा रहे छापों का विरोध करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं".

अभियान

उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान का बचाव किया था.

मुशर्रफ़ ने लंदन धमाकों की भर्त्सना करते हुए सभी पाकिस्तानी लोगों से समाज में नफ़रत और हड़कंप मचाने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस वर्ष दिसंबर तक सभी मदरसों को सरकार के पास रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.

साथ ही उन्होंने कहा कि जिन चरमपंथी गुटों को प्रतिबंधित किया गया है उन्हें नए नामों से संगठित नहीं होने दिया जाएगा.

पाकिस्तान में 2000 और 2002 में भी चरमपंथियों के विरूद्ध अभियान चलाया गया था लेकिन जिन संगठनों को प्रतिबंधित किया गया उनमें से कई नाम बदलकर फिर काम करने लगे.

इस बार पाकिस्तान में कई जगहों पर ऐसे अभियान चलाए गए हैं जिनमें कई लोगों को पकड़ा गया है और कई प्रकाशित सामग्रियों पर पाबंदी लगा दी गई है.

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