|
तीन 'हमलावर' पाकिस्तान गए थे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि लंदन बम धमाकों के तीन 'आत्मघाती हमलावरों' ने पिछले साल पाकिस्तान का दौरा किया था. फ़ेडरल जाँच एजेंसी (एफ़आईए) के अधिकारियों ने इनकी तस्वीरें भी जारी की हैं. मोहम्मद सिद्दीक़ी ख़ान और शहज़ाद तनवीर तो एक साथ पाकिस्तान आए और एक साथ वापस लंदन लौटे. उन्होंने पाकिस्तान में तीन महीने बिताए. जबकि तीसरे 'आत्मघाती हमलावर' हसीब हुसैन पिछले साल जुलाई में पाकिस्तान पहुँचे लेकिन अभी ये पता नहीं चल पाया है कि वे कितने दिनों तक पाकिस्तान में रुके. पाकिस्तान में सुरक्षा अधिकारी ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अपने पाकिस्तान दौरे के समय ये तीनों लोग किन-किन गतिविधियों में शामिल थे. ये तीनों 'आत्मघाती हमलावरों' के साथ-साथ एक अन्य आत्मघाती हमलावर पिछले दिनों लंदन में हुए बम धमाकों में मारे गए. इन्हें लेकर कुल 55 लोग इन धमाकों में मारे गए थे. पाकिस्तान दौरा उत्तरी लीड्स के इंग्लैंड में रहने वाले इन तीन 'आत्मघाती हमलावरों' के पाकिस्तान दौरे के बारे में हवाई अड्डे से मिली जानकारी को आधार बनाया गया. अधिकारियों ने बताया है कि कराची हवाई अड्डे से मिली सूचना के मुताबिक़ शहज़ाद तनवीर पिछले साल 19 नवंबर को ब्रितानी पासपोर्ट नंबर 453897014 पर कराची आए थे. वे तुर्की की विमान सेवा टीके-1056 से कराची पहुँचे. उसी दिन इसी विमानसेवा से मोहम्मद सिद्दीक़ी भी कराची पहुँचे थे. उनका ब्रितानी पासपोर्ट नंबर था- 040169095. दोनों पाकिस्तान में क़रीब तीन महीने तक रहे और तुर्की विमान सेवा टीके-1057 से आठ फरवरी को लंदन के लिए रवाना हुए. तीसरे 'आत्मघाती हमलावर' हसीब हुसैन पिछले साल 15 जुलाई को कराची आए थे. ब्रितानी पासपोर्ट नंबर 300514155 पर वे रियाद से कराची आए थे. हसीब हुसैन के लंदन लौटने का कोई रिकार्ड कराची हवाई अड्डे पर मौजूद नहीं था. माना जा रहा है कि वे लाहौर या इस्लामाबाद से लंदन वापस लौटे. इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि शहज़ाद तनवीर ने लाहौर और फ़ैसलाबाद का दौरा किया था. उनके परिवार वालों का कहना है कि शहज़ाद तनवीर ने वहाँ मदरसे में तालीम पाई. ख़ुफ़िया अधिकारी ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन लोगों का संबंध अल क़ायदा या किसी अन्य चरमपंथी गुट से तो नहीं था या कहीं लंदन में सात जुलाई को हुए बम धमाकों की साज़िश पाकिस्तान में तो नहीं रची गई थी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||