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मदरसों पर सरकारी निगरानी होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में ब्रिटेन के साथ हैं, साथ ही उन्होंने धार्मिक कट्टरता को रोकने के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने गुरूवार को टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि लंदन बम धमाकों के पीछे जिन लोगों का हाथ है, उन्हें इंसान नहीं कहा जा सकता और इस तरह के लोग इस्लाम की छवि बिगाड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के लोग पाकिस्तान का नाम भी बदनाम कर रहे हैं. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि देश में चलने वाले सभी मदरसों को दिसंबर, 2005 तक सरकार के पास पंजीकरण कराना होगा. उन्होंने मदरसों पर निगरानी रखने के लिए एक नया सरकारी विभाग भी बनाने की घोषणा की. ग़ौरतलब है कि लंदन बम धमाकों में पुलिस ने जिन लोगों का हाथ होने की आशंका व्यक्त की है उनमें से तीन पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी नागरिक थे, जो ख़ुद भी धमाकों में मारे गए. राष्ट्र के नाम संबोधन में परवेज़ मुशर्रफ़ ने पाकिस्तान पर की गई कुछ टिप्पणियों के लिए मीडिया की आलोचना भी की और कहा कि ब्रिटेन में वहीं पैदा हुई चरमपंथी समस्याएँ हैं जिनसे निपटने की ज़रूरत है. पाकिस्तान में हाल ही में कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ चलाए गए अभियान में 200 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान और ब्रिटेन साथ-साथ हैं. उन्होंने कहा कि लंदन बम धमाकों के लिए जिन पर संदेह व्यक्त किया गया है उनमें से हो सकता है तीन लोग पाकिस्तानी मूल के थे लेकिन उनकी पैदाइश, परवरिश और पूरी शिक्षा ब्रिटेन में ही हुई. उन्होंने लंदन बम धमाकों के चौथे संदिग्ध की पृष्ठभूमि की तरफ़ भी इशारा किया. ग़ौरतलब है कि लंदन पुलिस ने चौथे हमलावर को जमैका मूल का बताया था. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "मैं ये तो नहीं जानता कि क्या तीन हमलावरों ने पाकिस्तान में तालीम पाई थी लेकिन जमैका मूल के संदिग्ध ने कहाँ तालीम हासिल की थी?" उन्होंने कहा, "इंग्लैंड में बहुत से कट्टरपंथी संगठन सक्रिय हैं जो बिना किसी क़ानूनी डर के काम करते हैं. वे मेरी मौत का भी फ़रमान जारी कर सकते हैं लेकिन वे बिना किसी डर के काम करते हैं." परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि पाकिस्तान काफ़ी कुछ करेगा लेकिन इंग्लैंड को भी काफ़ी कुछ करने की ज़रूरत है. |
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