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मुशर्रफ़ की घोषणा पर मचा बवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के मदरसों में पढ़ रहे विदेशी छात्रों को देश छोड़ने के लिए कहे जाने पर छात्रों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीक़े से पढ़ाई कर रहे हैं. पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ ने शुक्रवार को कहा था कि मदरसों में पढ़ रहे क़रीब 1400 छात्रों को देश छोड़ना पड़ेगा. इस निर्णय को लेकर कट्टरपंथी राजनेताओं और मदरसों ने भी अपनी नाराज़गी ज़ताई है. कट्टरपंथी इस्लामी पार्टियों के गठबंधन मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल के नेता सईद मुनव्वर हसन ने इसे अमानवीय क़दम बताया है. वहीं कराची के एक मदरसे में पढ़ने वाले अब्दुल सामद कहते हैं, “मैं ब्रितानी नागरिक हूँ और यहाँ इस्लाम के बारे में जानकारी हासिल करने आया हूँ. हमें अपनी शिक्षा पूरी करने दी जाए.” मुशर्रफ पर दबाव राष्ट्रपति मुशर्रफ का कहना है कि मदरसों का दुरुपयोग रोक़ने के लिए उन्होंने ये फ़ैसला लिया है.
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री आफ़ताब ख़ान शेरपाव ने कहा है कि दूसरे देशों ने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि वहाँ पढ़ने आए उनके नागरिकों का नाम चरमपंथी गतिविधियों से जुड़ रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ लंदन धमाकों में शामिल एक हमलावर ने पाकिस्तान के मदरसे में पढ़ाई की थी. इस ख़बर के बाद से ही मदरसे चर्चा का केंद्र बने हुए हैं और पाकिस्तान पर इसका दबाव पड़ रहा था कि वह चरमपंथियों पर कार्रवाई करे. 15 जुलाई के बाद से पाकिस्तान में हज़ारों मौलवियों और संदिग्ध चरमपंथियों को हिरासत में लिया जा चुका है. |
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