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बिहार में राजनीतिक अनिश्चितता जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है और अभी तक राजनीतिक पार्टियाँ सरकार बनाने लायक समीकरण नहीं बना पाई हैं. चुनाव में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के विधायक दल ने राबड़ी देवी को अपना नेता चुन लिया है. लालू यादव ने विधायक दल की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी सरकार बनाने का दावा पेश करेगी. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति शासन के विरूद्ध है और वे सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के साथ मिलकर बहुमत जुटाने की कोशिश करेंगे. लालू यादव ने ये भी कहा कि वे रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी से हाथ नहीं मिलाएँगे. समीकरण बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद तीन तरह के समीकरण उभरे हैं. 243 सदस्यों वाली विधानसभा में सरकार बनाने की जादुई संख्या 122 है. चुनाव में सर्वाधिक सीटें जीतनेवाली पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू यादव ने भाजपा, जेडी(यू), समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को छोड़कर अपने पास 138 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. मगर इस संख्या में उन्होंने पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी, वाम दलों (सीपीआई और सीपीआईएम) तथा निर्दलीय विधायकों को शामिल किया था. उधर जेडी(यू) नेता नीतिश कुमार ने आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों को छोड़कर कुल 145 सदस्यों के समर्थन की बात की है. इस संख्या में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय विधायकों को शामिल किया है. उधर रामविलास पासवान की पार्टी का अंकगणित 132 सीटों को अपने पक्ष में दिखाता है. इसमें भाजपा और आरजेडी के अलावा बाक़ी सभी दलों को शामिल बताया गया है जिसमें जेडी(यू) भी है. इन तीनों समीकरणों में जो पेंच है वो है लोक जनशक्ति पार्टी और निर्दलीय विधायकों का जिनकी संख्या मिलकर 47 होती है. ऐसे में सरकार उसी की बनेगी जिधर ये जाएँगे. मगर विभिन्न दलों के नेताओं के बयान से ये लगता नहीं है और ऐसे में प्रेक्षकों की राय में राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना अधिक मज़बूत लगती है. |
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