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रविवार, 20 फ़रवरी, 2005 को 07:13 GMT तक के समाचार
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चर्चा में है लालू का एम-वाई समीकरण

लालू प्रसाद यादव
लालू का कहना है कि विपक्ष का आरोप बेबुनियाद है
बिहार में विधानसभा चुनावों में लालू प्रसाद यादव के एमवाई समीकरण को लेकर बड़ी चर्चा होती रही है.

एमवाई यानी मुस्लिम और यादव मतदाताओं के ध्रुवीकरण से बनने वाला समीकरण.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यही समीकरण तय करता है बिहार की विधानसभा का स्वरूप क्या होगा.

चूंकि लालू प्रसाद यादव इन चुनावों में अपने लोकसभा के साथी रामविलास पासवान के साथ नहीं हैं और कुछ और राजनीतिक समीकरण बने बिगड़े हैं इसलिए यह चर्चा चल रही है कि क्या पिछले तीन विधानसभाओं में जादू की तरह चलने वाला एमवाई समीकरण बिखर जाएगा?

विपक्षी दल ज़ोरशोर से प्रचार कर रहे हैं कि लालू जी का समीकरण बिखर गया, उसमें दरार आ गई लेकिन लालू प्रसाद यादव आश्लस्त हैं और विपक्षियों के हर दावे को सिरे से ख़ारिज करते हैं.

एक ओर तो यह चर्चा है वहीं असंतुष्ट यादव प्रत्याशियों के चलते भी लालू के लिए रास्ता आसान नहीं दिख रहा है. ख़ुद लालू के दाएँ-बाएँ हाथ माने जाने वाले उनके साले साधु यादव, पप्पू यादव और प्रभुनाथ यादव, इस बार बागी बनकर सामने हैं.

नए ख़ैरख़्वाह

प्रचार चल रहा है कि लालू की जगह अब इस वोट बैंक को नए ख़ैरख़्वाह भाने लगे हैं.

पासवान
पासवान की लालू से दूरी और कांग्रेस से नज़दीकी ने भी चर्चाओं को तूल दिया

मुसलमानों की पसंद के रुप में रामविलास पासवान का नाम सबसे आगे है.

पासवान इसके लिए वो एक बड़ी तैयारी के साथ मैदान में हैं और मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने का एक भी मौक़ा नहीं छोड़ रहे हैं.

अपने आपको मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने से पहले उन्होंने यह तक कहा कि मुख्यमंत्री तो किसी मुसलमान को ही होना चाहिए.

पासवान इस बार अपने साथ सभी चुनावी मंचों पर मुस्लिम संप्रदाय के प्रतिनिधियों को साथ लेकर आ रहे हैं. वो सभी चुनावी सभाओं में भागलपुर के दंगापीड़ितों को राहत न दिए जाने का मुद्दा उठाने से नहीं चूक रहे.

पर इतना आसान नहीं..

हालांकि लालू ख़ुद इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं कि उनका समीकरण बिखर रहा है.

हालांकि वो जनसभाओं में कहते नज़र आ रहे हैं कि लोग राजद को वोट दें, न कि प्रत्याशी के यादव और मुसलमान होने के आधार पर.

अब यह समझ पाना कठिन है कि जाति और संप्रदाय के वोटों के गणित से पिछले 15 सालों से बिहार में शासन करते आए लालू या उनकी पार्टी को अपना बयान क्यों बदलना पड़ा है.

हालाँकि चुनाव परिणामों के सामने आने से पहले बिहार विधानसभा के स्वरूप के बारे में कुछ ज़्यादा कहना उचित नहीं होगा क्योंकि परिणामों से ही तय होगा कि विपक्ष का प्रचार सही था या लालू प्रसाद का दावा.

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