BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 22 फ़रवरी, 2005 को 00:59 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
गोवा की पार्टी, झारखंड का चुनाव चिन्ह

दो पत्तियाँ
झारखंड में चुनाव चिन्ह को पाने की कवायद
इस बार झारखंड के विधानसभा चुनावों में एक चुनाव चिन्ह ऐसा है जो कभी झारखंड का था पर अब गोवा की एक क्षेत्रीय पार्टी, युनाइटेड गोवंस डेमोक्रेटिक पार्टी (यूजीडीपी) के पास है.

और इसी पार्टी के नाम पर झारखंड में करीब 26 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं.

यह जानकर ताज्जुब तो ज़रूर होता है पर अपने पुराने चुनाव चिन्ह को झारखंड में वापस लाने की कवायद में इस पार्टी से तमाम प्रत्याशी मैदान में हैं.

ये चुनाव चिन्ह है सखुआ पेड़ के दो पत्ते यानी जोड़ा पत्ता.

दुमका ज़िले के अंतर्गत आने वाले एक विधानसभा क्षेत्र, परैयाहाट से यूजीडीपी के प्रत्याशी कुंदन कुमार लाल बताते हैं कि जयपाल सिंह ने पृथक झारखंड की माँग सबसे पहले उठाई थी.

पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से समझौते के बाद यह आंदोलन ढीला पड़ गया था. बाद में देवेंद्र माँझी ने इसी चिन्ह को लेकर यह अभियान आगे बढ़ाया पर उनकी हत्या कर दी गई.

उस झारखंड में उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के भी कुछ हिस्से को शामिल किया गया था. हालांकि उस अभियान की जगह अस्सी के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने ले ली.

हालांकि कुंदन लाल की अपनी पार्टी का नाम झारखंड मुक्ति मोर्चा (डेमोक्रेटिक) है पर वो बताते हैं कि किन्हीं कारणों से अब यह चुनाव चिन्ह हमारे पास नहीं है.

अगर हम इस चुनाव में मतों का एक न्यूनतम प्रतिशत पाने में सफल रहते हैं तो हमें एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी के रूप में यह चुनाव चिन्ह मिल जाएगा.

प्रचलित प्रतीक

जोड़ा पत्ता का चिन्ह झारखंड के लोगों के लिए अपरिचित नहीं है.

वजह यह है कि झारखंड में ख़ासतौर पर आदिवासी समुदाय के लोगों में यह ख़ासा प्रचलित चिन्ह है.

 अगर हम इस चुनाव में मतों का एक न्यूनतम प्रतिशत पाने में सफल रहते हैं तो हमें एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी के रूप में यह चुनाव चिन्ह मिल जाएगा.
कुंदन लाल, यूजीडीपी के प्रत्याशी

लोगों के घर में किसी के जन्म से लेकर शादी, अन्य संस्कारों और यहाँ तक कि मृत्यु के समय भी यह जोड़ा पत्ता तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

लोग इसे अपने गाँव या आसपास की कोई आमसभा बुलाने या किसी तरह की सूचना देने के लिए भी इस्तेमाल करते रहे हैं.

लोग इस चिन्ह को लेकर उत्साहित भी हैं. कई गाँवों में हमने जब लोगों से पूछा तो लोगों ने कहा कि यह जोड़ा पत्ता उनकी ज़िंदगी में एक अहम हिस्सा रखता है.

क्षेत्र के तमाम लोगों का मानना है कि अगर यह चिन्ह लोगों के बीच एक क्षेत्रीय पार्टी के चिन्ह के रूप में प्रचारित हो गया तो इसका बड़ा राजनीतिक लाभ पार्टी को आने वाले समय में मिल सकता है.

आदिवासी समुदाय के कुछ वरिष्ठ लोग बताते हैं, "अगर इसे ठीक ढंग से प्रचार मिले तो यह चुनाव चिन्ह, झारखंड मुक्ति मोर्चा के चुनाव चिन्ह तीर-कमान पर भारी भी पड़ सकता है."

इस पार्टी से फिलहाल राज्य में दो विधायक हैं और दोनों के पास ही राज्य सरकार में मंत्री पद भी हैं.

इस बार चुनाव मैदान में इसके 26 प्रत्याशी हैं और पार्टी को उम्मीद है कि इस बार के चुनाव परिणामों में उन्हें अच्छी बढ़त मिल सकती है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>