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शनिवार, 19 फ़रवरी, 2005 को 02:58 GMT तक के समाचार
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अब पासवान बनना चाहते हैं मुख्यमंत्री
रामविलास पासवान
रामविलास पासवान ने पहले कहा था कि वे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते
जब बिहार में चुनावों की घोषणा हुई और रामविलास पासवान कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह जनता दल (यू) से तालमेल हो जाए तब उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान किया था.

लेकिन वो गठबंधन हुआ नहीं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनकी पार्टी को बहुत सम्मान के साथ सीटें दीं तो उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस का मुख्यमंत्री स्वीकार करने को तैयार हैं.

चुनाव प्रचार करते हुए उन्हें लगा कि लालू प्रसाद यादव के एम-वाई (मुस्लिम यादव) समीकरण को तोड़कर मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर लाना ज़रुरी है तो उन्होंने 'किसी मुसलमान को ही' मुख्यमंत्री बनाने की बात कही.

लेकिन तीसरे चरण के मतदान के पहले उन्होंने चौथी बार मन बदलते हुए ऐलान कर दिया है कि अब वे ख़ुद ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं.

उनकी पार्टी की ओर से छपे विज्ञापनों में कहा गया है, "ताजपोशी की करो तैयारी, रामविलास की अबकी बारी."

मतदाता रामविलास पासवान के इस दावेदारी को कितनी गंभीरता से लेंगे पता नहीं क्योंकि उनके पुराने साथी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने छूटते ही कहा, "लगता है उनका दिमाग़ फिर गया है, लोग तो समझ ही रहे होंगे कि वे किस तरह के नेता हैं."

कारण

बिहार के पटना संवाददाता मणिकांत ठाकुर पासवान की इस घोषणा का कई कारण देखते हैं.

पासवान और लालू यादव
लोकसभा चुनाव में दोनों नेता साथ थे लेकिन अब वे एक दूसरे के ख़िलाफ़ आग ही उगल रहे हैं

एक तो लोकजनशक्ति पार्टी नेता पासवान को लग रहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री घोषित करने से यह संकेत जा रहा है कि राज्य में लालू प्रसाद यादव के बाद नीतीश की नेता हैं. वे इस संकेत को रोकना चाहते हैं.

दूसरा वे चाहते हैं लालू यादव के एमवाई समीकरण के कथित रुप से दरकने का लाभ उन्हें मिले और मुस्लिम मतदाता उन्हें ही वोट दें.

तीसरे केंद्र में मंत्री रहते हुए रामविलास पासवान ने बिहार में राष्ट्रपति शासन की जो बात कही थी वह कांग्रेस को भी नागवार गुज़री है. इसलिए पासवान अब कुछ नया करना चाहते थे.

संवाददाता मानते हैं कि हालांकि तीसरे चरण के मतदान में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक नहीं है लेकिन वे उनको लुभाने में कोई कसर नहीं रखना चाहते.

एनडीए का एजेंडा

दूसरी ओर एनडीए ने राज्य में एकसूत्रीय प्रचार जारी रखा है कि यदि एनडीए को वोट नहीं दिया तो राज्य में फिर लालू प्रसाद यादव का राज होगा.

एनडीए के नेता बार बार कह रहे हैं कि यदि कांग्रेस, लोकजनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल आख़िर में एक ही हो जाएँगे.

शुक्रवार को पटना में हुई एक बड़ी रैली में, जिसमें अटल बिहार वाजपेयी, जॉर्ज फ़र्नांडिस और नीतीश कुमार सभी मौजूद थे वाजपेयी जी ने यही बात दोहराई.

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