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लालू ने साथियों के लिए छह सीटें छोड़ीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने बिहार में पहले चरण के लिए 64 में से 58 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. उन्होंने झारखंड में भी पहले चरण की 24 में से 21 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. इस घोषणा से स्पष्ट हो गया है कि बिहार और झारखंड में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच कोई औपचारिक चुनावी गठबंधन नहीं हो सका है और कई सीटों पर सहयोगी दलों में दोस्ताना लड़ाई भी होने वाली है. पहले चरण में लालू प्रसाद यादव ने सहयोगी दलों यानी कांग्रेस और वामपंथी दलों के लिए सिर्फ़ वही सीटें छोड़ी हैं जो पहले ही उनके कब्ज़े में हैं. इनमें से तीन सीटें सीपीआई के पास हैं, दो सीपीएम के पास और सिर्फ़ एक सीट कांग्रेस के पास है. समझौते का हश्र रामविलास पासवान और लालू प्रसाद यादव के बीच खुले आरोप प्रत्यारोप के बाद यह स्पष्ट था कि दोनों के बीच किसी समझौते की संभावना नहीं है. लालू प्रसाद यादव ने उन सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जहाँ लोकजनशक्ति पार्टी चुनाव लड़ रही है. मख़दमपुर एक ऐसी सीट है जहाँ यूपीए के तीनों दलों के बीच लड़ाई का दिलचस्प नज़ारा दिखाई पड़ रहा है. वहाँ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामजतन सिन्हा पार्टी की इच्छा के ख़िलाफ़ वहाँ पर्चा दाखिल कर चुके हैं. वहाँ लोकजनशक्ति पार्टी ने कांग्रेस के पूर्व नेता रामाश्रय प्रसाद सिंह को मैदान पर उतारा है. जबकि लालू प्रसाद यादव ने भी वहाँ अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. झारखंड झारखंड में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के समझौते से नाराज़ लालू प्रसाद यादव ने वहाँ भी 24 में से 21 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने समझौते में आरजेडी और वामपंथी दलों के लिए सिर्फ़ 13 सीटें छोड़ी थीं. लालू प्रसाद यादव की नाराज़गी का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने सरफ़राज़ अहमद को भी टिकट देने की घोषणा कर दी है. अहमद बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं और दो दिन पहले ही कांग्रेस छोड़कर आरजेडी में आए हैं. |
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