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'भाजपा से कोई समझौता नहीं होगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने एक बार फिर कांग्रेस की ओर समझौते के लिए हाथ बढ़ाया है मगर उन्होंने साथ ही ये भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय जनता दल या भारतीय जनता पार्टी से किसी क़ीमत पर समझौता नहीं होगा. बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में पासवान ने कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी से मुलाक़ात में उन्होंने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा है और बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी भी कांग्रेस को देने की बात कही है. उल्लेखनीय है कि बुधवार को रामविलास पासवान की कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी से मुलाक़ात हुई थी जिसमें चुनाव समझौते को लेकर चर्चा हुई. वैसे पासवान ने कहा कि अभी समझौते को लेकर कोई 'फ़ॉर्मूला' चर्चा के लिए नहीं रखा गया है. उनका कहना था कि अगर दोनों पार्टियाँ मिलकर लड़ती हैं तो वे दो तिहाई सीटें जीत सकते हैं और बिहार की जनता बदलाव चाहती है. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों में बराबरी की हैसियत से बातचीत हुई है न कि सीट देने या लेने वाले के हिसाब से. बिहार में तीन चरण में चुनाव होने हैं और माना जा रहा है कि लोकजनशक्ति पार्टी की भूमिका चुनाव के बाद के समीकरणों में काफ़ी महत्त्वपूर्ण हो सकती है. 'बंद हो गया अध्याय' जनता दल यूनाइटेड के साथ समझौता नहीं हो पाने के बारे में उनका कहना था कि उन्होंने हमेशा यही कहा था कि पार्टी अगर भाजपा का साथ छोड़ दे तो दोनों पार्टियाँ साथ आ सकती हैं. पासवान ने कहा, "अब जब उन दोनों पार्टियों में सारी बातें तय हो गई हैं तो ये अध्याय अब बंद हो चुका है." कांग्रेस से समझौते की संभावना पर उनका कहना था, "हम सभी 243 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर चुके हैं. हमें इंतज़ार है कि कांग्रेस अगर साथ आ जाए तो अच्छा है, नहीं तो अकेले दम पर ही हम चुनाव लड़ेंगे." पासवान का कहना था कि अगर कांग्रेस से समझौता नहीं भी हुआ तो भी उनकी ओर से पार्टी से उनके संबंधों पर असर नहीं होगा. चुनाव नतीजे आने के बाद जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन से किसी भी तरह के समझौते से उन्होंने स्पष्ट इनकार किया. उन्होंने कहा, "हमने कह दिया है कि भाजपा और राजद हमारे लिए समान दूरी पर हैं. इनसे न तो प्री पोल समझौता होगा और न ही पोस्ट पोल." पासवान का कहना था कि उन्होंने जिस वजह से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार से इस्तीफ़ा दिया था उन्हीं सिद्धांतों के चलते वह किसी भी स्थिति में भाजपा के गठबंधन से समझौता नहीं कर सकते. |
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