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सोमवार, 31 जनवरी, 2005 को 18:22 GMT तक के समाचार
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आख़िर क्या सोच रहे हैं बिहार के वोटर?

बिहार के मतदाता
बिहार के मतदाता सत्ता परिवर्तन चाहते हैं या नहीं कहना मुश्किल
राबड़ी और लालू प्रसाद यादव की सरकार सत्ता में रहने का नया रिकॉर्ड बनाएगी या फिर सत्ता परिवर्तन होगा, पहले चरण के चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में यह सवाल लेकर हम मतदाताओं के पास पहुँचे.

आरा के एक मतदाता ने कहा, "आरजेडी सरकार के खिलाफ कई शिकायते हैं. इस सरकार ने बहुत से कर्मचारी की छँटनी की है. मैं खुद ऐसे कर्मचारियों में शामिल हूँ जो छंटनी की नीति का शिकार हुए हैं. सरकार की इस नीति के चलते कई लोग मौत के शिकार हो गए और कई लोग अभी भी मौत का इंतज़ार कर रहे हैं."

यहीं के एक अन्य मतदाता का कहना था- "रोड का जो हाल है आप भी देख चुके होंगे कि ब्रह्मपुर आने-जाने में क्या स्थिति है. यह तो प्रजातंत्र राज है, वोटरो का हक़ है कि वह जिसको चाहे बदल सकता है और जिसको चाहे कुर्सी पर बैठा सकता है. यह किसी की बपौती नहीं है."

 वोटरो का हक़ है कि वह जिसको चाहे बदल सकता है और जिसको चाहे कुर्सी पर बैठा सकता है. यह किसी की बपौती नहीं है
आरा के एक मतदाता

एंटी-इनकम्बेंसी यानी राष्ट्रीय जनता दल के 15 साल की सत्ता पर शाहपुर, ब्रह्मपुर, डुमराँव, आरा और बक्सर विधानसभा क्षेत्रों में कई लोगों ने सरकार की मुखर आलोचना की.

लेकिन जब हमने उनके सामने दूसरा सवाल रखा कि पाँच साल पहले जिन कारणों से राष्ट्रीय जनता दल चुनाव जीती थी, क्या उनमें कोई परिवर्तन आया है और क्या विकास इन चुनावों में मुद्दा बन पाया है.

एक वोटर से जवाब मिला, "लगभग 60 प्रतिशत से ज़्यादा लोग जात पर अपना वोट देते हैं और 40 प्रतिशत से भी कम मतदाता हैं वो सजग उम्मीदवार को देखकर वोट देते हैं, शिक्षा की कमी है वर्ना विकास को ही भारी होनी चाहिए. शिक्षा की कमी है इसलिए जाति पर ही वोट देते हैं."

समीकरण

बिहार में लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल की सत्ता का आधार एमवाई यानी मुसलमान और यादव समीकरण को माना जाता रहा है.

बिहार के मतदाता

इसी समीकरण को ध्यान में रखकर हमने कुछ मुसलमान मतदाताओं से अपना तीसरा सवाल पूछा कि क्या वो राष्ट्रीय जनता दल की सरकार से संतुष्ट हैं.

इस पर इन मतदाताओं में से ज़्यादातर का मानना था कि राष्ट्रीय जनता दल की सरकार के जमाने में विकास का काम अच्छा नहीं रहा है और अपराध भी बढ़ा है.

 शिक्षा की कमी है वर्ना विकास को ही भारी होनी चाहिए. शिक्षा की कमी है इसलिए जाति पर ही वोट देते हैं
एक वोटर

एक मतदाता का यह कहना था कि मुसलमान स्वयं को लालू प्रसाद यादव के राज में सुरक्षित महसूस करता है. पर यह भी सच है कि इस समय में बिहार में अपराध बढ़ा है. उनके अनुसार लालू प्रसाद यादव ने 15 साल के समय का सही उपयोग नहीं किया.

लेकिन मुसलमान मतदाताओं की दुविधा यह है कि रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी और कांग्रेस मिलकर भी उन्हें यह विश्वास नहीं दिला पा रहे हैं कि वो राज्य में एक धर्मनिरपेक्ष सरकार देने में सक्षम हैं और इसी दुविधा के कारण इस माई समीकरण का एम यानी मुसलमान राष्ट्रीय जनता दल के साथ ही बना रह सकता है.

एनडीए यानी जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. वहीं रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी और कांग्रेस मिलकर त्रिकोण बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन इस त्रिकोण में लालू प्रसाद यादव के मुसलमान और यादव अधार को ज्यादा नुकसान होता नज़र नहीं आ रहा है.

साथ ही, सभी पार्टियों में भितरघात और स्थानीय समीकरण राष्ट्रीय जनता दल के खिलाफ आक्रोश को किस हद तक वोटों में बदलने देगा यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है.

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