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बिहार के डॉक्टर बेमुद्दत हड़ताल पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के सरकारी और निजी डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाएँ ठप्प पड़ा गई हैं. समाचार एजेंसियों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के हवाले से कहा है कि 20 हज़ार डॉक्टर हड़ताल पर हैं. दीवाली के दिन एक वरिष्ठ सर्जन एनके अग्रवाल और उनके सहायक की हत्या के विरोध में ये हड़ताल की जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि आपराधिक तत्वों से लगातार मिल रही धमकियों के कारण वे हड़ताल पर जा रहे हैं. इस हड़ताल से आम लोगो को भारी परेशानी की आशंका जताई जा रही है क्योंकि डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाएँ भी बंद रखने का निर्णय लिया है. हालांकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने बिहार में स्थिति बिगड़ने की आशंका से इंकार किया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार डॉक्टरों की इस हड़ताल को व्यापारियों ने भी अपना समर्थन देने की घोषणा की है. शनिवार की शाम सरकारी और निजी चिकित्सकों के संगठनों ने पटना में एक बैठक के बाद यह फैसला किया. इस बैठक के बाद डॉक्टरों ने एक रैली भी निकाली और फिर राज्यपाल बूटासिंह से भी मिले. उन्होंने डॉक्टर एनके अग्रवाल की हत्या के लिए दोषी लोगों को गिरफ़्तार करने और सभी डॉक्टरों के लिए समुचित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया. पटना से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर का कहना है कि आमतौर पर माना जाता है कि डॉक्टर सम्पन्न होते हैं और इसीलिए अपराधी उनको डरा धमकाकर पैसा वसूलने के फेर में रहते हैं. |
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