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'हिंदू विरोधी नीतियों से बाज़ आएँ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी ने अपने विरोधियों को चेतावनी दी है कि वे हिंदू विरोधी राजनीति से बाज़ आएँ. शंकराचार्य की ग़िरफ़्तारी को पार्टी ने हिंदुत्व का अपमान बताया है. झारखंड की राजधानी राँची में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार और सरकार को समर्थन दे रही कम्युनिस्ट पार्टियों को अपना निशाना बनाया. लालकृष्ण आडवाणी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक हो रही है. बुधवार को शुरु हुई कार्यकारिणी की बैठक से पहले पार्टी की राँची में एक रैली भी हुई. तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक के लिए राँची का चुनाव राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए किया गया. झारखंड में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस लोकसभा चुनाव में राज्य में पार्टी का प्रदर्शन बहुत ख़राब रहा था. पार्टी को राज्य से सिर्फ़ एक सीट ही मिल पाई थी जबकि इससे पहले राज्य की 14 में से 11 सीटों पर उसका क़ब्ज़ा था. भाजपा की झारखंड में रैली और फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को राज्य में पार्टी की चुनावी तैयारी माना जा रहा है. हिंदू विरोधी नीति पार्टी कार्यकारिणी के पहले दिन लालकृष्ण आडवाणी का अध्यक्षीय भाषण मीडिया के लिए जारी किया गया. भाषण के दौरान मीडिया को बैठक स्थल से बाहर रखा गया. आडवाणी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में शंकराचार्य की ग़िरफ़्तारी का मुद्दा उठाया और कहा कि यह हिंदुत्व का अपमान है. उन्होंने कहा कि आस्था और महंगाई- दो प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर दृढ़ता से जवाब देने की ज़रूरत है. आडवाणी ने कहा, "मैं चाहता हूँ कि भारत के लोग इस प्रश्न पर सोचें कि किन लोगों ने इस प्रकार का बेतुका और विकृत बौद्धिक वातावरण पैदा किया है जहाँ हिंदू धर्म, लोकाचार और हिंदू धर्म से संबंधित किसी भी बात को सांप्रदायिक, दकियानूसी माना जाता है." आडवाणी ने सत्ताधारी कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी पर भी जम कर प्रहार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का एक वर्ग, कम्युनिस्ट और अन्य राजनीतिक शक्तियाँ इस देश से हिंदू लोकाचार को सुव्यवस्थित ढंग से धीरे-दीरे मिटाने की साज़िश रच रही हैं. आडवाणी ने कहा कि ये लोग हमारी संस्कृति और सभ्यता की मूल हिंदू पहचान को ही मिटाने में लगे हुए हैं. भाजपा अध्यक्ष ने कश्मीर मुद्दे पर भी केंद्र सरकार का फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि एक तरफ़ तो प्रधानमंत्री ने श्रीनगर में ये कहा कि उप महाद्वीप में कोई रेखा नहीं खिंची जाएगी, तो दूसरी तरफ़ कहा जा रहा है कि पैकेज समाधान के रूप में कुछ रेखाओं को मिटाया जा सकता है. आडवाणी के भाषण में अयोध्या का मुद्दा भी उठा. उन्होंने कहा कि बीजेपी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) आगे बढ़कर ये घोषणा कर रही है कि हमें बातचीत के द्वारा हल करने का तरीक़ा ज़्यादा उचित लगता है. बिहार के बारे में अध्यक्षीय भाषण का एक पूरा पैराग्राफ़ समर्पित है, जिसका शीर्षक है- आसुरी शक्तियों के चंगुल से बिहार को मुक्त कराएँ. आडवाणी ने कहा कि अगले दो दिसंबर को पटना में होने वाली पार्टी की विशाल रैली में युद्ध रेखाएँ खिंची जाएँगी. रैली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले राँची में भाजपा की एक बड़ी रैली भी हुई. जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी मौजूद थे.
आडवाणी ने रैली में भी आतंकवाद और महंगाई की बात उठाई और चुनावी बिगुल फूँकने की कोशिश की. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि रैली और कार्यकारिणी की बैठक राज्य में पार्टी की चुनावी तैयारियों की शुरुआत है. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे संगठित होकर काम करें और वोट बँटने न दें. उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यक्रमों के आधार पर जनता से समर्थन मांगे. रैली में वाजपेयी ने आडवाणी की प्रशंसा के पुल बाँध दिए. उन्होंने गृह मंत्री के रूप में आडवाणी के कामकाज की जम कर तारीफ़ की. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के रूप में आडवाणी को काम करते देखकर उन्हें वल्लभ भाई पटेल की याद आ गई. |
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