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गुजरात सरकार सबक सीखे:न्यायमूर्ति खरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीएन खरे ने कहा है कि गुजरात सरकार को अब सबक़ सीखना चाहिए और सांप्रदायिक दंगों को जो 400 से ज़्यादा मुक़दमे लंबित हैं उनकी निष्पक्ष जाँच और सुनवाई करानी चाहिए. बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम - आपकी बात बीबीसी के साथ - में श्रोताओं के सीधे सवालों के जवाब देते हुए न्यायमूर्ति वीएन खरे ने न्यापालिका में भ्रष्टाचार को भी आड़े हाथों लिया. न्यायमूर्ति वीएन हाल ही में मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और इस ज़िम्मेदारी से मुक्त होते ही उन्होंने कहा था कि न्यायिक पदों पर नियुक्तियों में राजनीतिक दख़लअंदाज़ी बढ़ रही है. न्यायमूर्ति खरे ने श्रोताओं के सवालों के जवाब में कहा कि सांप्रदायिक दंगों में शामिल लोगों को इसलिए सज़ा नहीं मिल पाती क्योंकि गवाहों को ख़रीद लिया जाता है. उन्होंने कहा कि गुजरात में ऐसी ही कुछ घटनाएं सामने आने के बाद न्यायालय को कुछ मुक़दमों की सुनवाई महाराष्ट्र में कराने के आदेश देने पड़े. न्यायमूर्ति खरे ने कहा कि गुजरात सरकार को अब इससे सबक़ सीखना चाहिए और दंगों के 400 से ज़्यादा जो मुक़दमे लंबित हैं उनकी निष्पक्ष जाँच और सुनवाई सुनिश्चित करानी चाहिए. न्यायपालिक के कामकाज के बारे में न्यायमूर्ति खरे ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों को कुछ और अधिकार दिए जाने की ज़रूरत है ताकि वे निचली अदालतों पर नज़र रखते हुए निष्पक्ष न्याय प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए क़दम उठा सकें. न्यायमूर्ति खरे ने कहा कि गुजरात सरकार का यह आरोप ग़लत है कि न्यायालय ने उसकी बातें सुने बिना ही मुक़दमे महाराष्ट्र में चलाने का आदेश दे दिया. उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार की बात सुनी गई लेकिन उसकी कार्रवाइयों के बारें में संतुष्ट नहीं होने पर ही मुक़दमों की सुनवाई महाराष्ट्र में कराने के आदेश दिए गए. |
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