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एक्ज़िट पोल पर रोक लगाने से इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मतदान के बाद होने वाले सर्वेक्षणों यानी 'एक्ज़िट पोल' के प्रकाशन और प्रसारण पर इन चुनाव में रोक लगाने से इनकार कर दिया है. एक जनहित याचिका दायर कर डीएस ठाकुर ने एक्ज़िट पोल पर रोक लगाने की माँग करते हुए कहा था कि इससे मतदाता प्रभावित होते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी एक्ज़िट पोल पर रोक लगाने से इनकार किया था. न्यायमूर्ति राजेंद्र बाबू की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और चार टेलीविज़न चैनलों को नोटिस जारी करके जवाब देने को कहा है. जिन चार टेलीविज़न चैनलों के नाम नोटिस हैं वे एनडीटीवी, आज तक, सहारा और ज़ी टीवी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख़ अभी तय नहीं की है. याचिकाकर्ता डीएस ठाकुर ने सुनवाई के बाद पत्रकारों को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से पूछा है कि क्या एक्ज़िट पोल संविधान की धारा 92 और जनप्रतिनिधित्व क़ानून का उल्लंघन नहीं है. उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग की एक बैठक में सभी राजनीतिक दल एक स्वर से कह चुके हैं कि उनकी राय में चुनाव पूर्व और मतदान के बाद होने वाले सर्वेक्षणों से मतदाता प्रभावित होते हैं इसलिए इस पर रोक लगाई जानी चाहिए. |
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