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एक्ज़िट पोल का मुद्दा फिर सुप्रीम कोर्ट में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक्ज़िट पोल का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है. एक्ज़िट पोल के प्रकाशन और प्रसारण पर पाबंदी लगाने की माँग पर दायर एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा. ये याचिका डीके ठाकुर ने दायर की है. इस याचिका में कहा गया है कि एक्ज़िट पोल जनप्रतिनिधित्व क़ानून के विरुद्घ है और इससे मतदाताओं की सोच पर असर पड़ता है. सोमवार की ये सुनवाई एक्ज़िट पोल के मामले में अहम मानी जा रही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक पुराने फैसले में इस पर रोक लगाने से इंकार कर चुका है. दिलचस्प है कि राजनीतिक दल इस पर रोक लगाने को लेकर पहले से ही एकमत हैं. राज्यपाल का मामला उधर कांग्रेस ने हरियाणा के राज्यपाल बाबू परमानंद के भाषण पर आपत्ति जताते हुए इसे संविधानिक अधिकारों का दुरुपयोग बताया है. प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी का कहना था कि कांग्रेस इसकी निंदा करती है और मानती है कि भाजपा अब राज्यपालों का दुरुपयोग भी कर रही है. उनका कहना था कि भाजपा पार्टी और सरकार में कोई भेद नहीं करती जो ग़लत है. उल्लेखनीय है कि राज्यपाल बाबू परमानंद ने अपने भाषण में दलित समुदाय से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पक्ष में मतदान करें. शरद यादव की शिकायत उधर मधेपुरा में पिछली बार लालू प्रसाद यादव को हरा कर चुनाव जीत चुके शरद यादव ने शिकायत की है कि वहाँ तमाम असामाजिक तत्व आधुनिक हथियारों के साथ खुले आम घूम रहे हैं. उनका कहना है कि इससे लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है. उन्होंने प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करते हुए मधेपुरा में निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था की जानी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि वे इस बार भी लालू को हराएँगे. |
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