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बुधवार, 07 अप्रैल, 2004 को 17:09 GMT तक के समाचार
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कांग्रेस का फिर ग़रीबी हटाने का नारा...
काँग्रेस के नेतागण
'ग़रीबी हटाओ' पर ज़ोर रहेगा कांग्रेस का
कांग्रेस ने अपने दृष्टि-पत्र में एक बार फिर ग़रीबी हटाने के लिए काम करने का संकल्प व्यक्त किया है.

काँग्रेस से कुछ दिन पहले अपना घोषणा-पत्र जारी करते हुए कहा था कि वह आर्थिक स्थिति, सामाजिक न्याय और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति पर तीन अलग-अलग दृष्टि-पत्र जारी करेगी.

इनमें से आर्थिक मामलों पर कांग्रेस का दृष्टि-पत्र बुधवनार को जारी कर दिया गया.

इस आर्थिक दृष्टि पत्र की ख़ास बात यह है कि इसमें कांग्रेस ने 70 के दशक में उसे सत्ता दिलाने में सहायक नारे - ग़रीबी हटाओ को एक बार फिर उछालने की बात कही है.

दृष्टि-पत्र में कहा गया है कि आर्थिक विकास की जो नींव 80 से 90 के दशक में रखी गई थी उसी पर कांग्रेस भविष्य की इमारत खड़ी करेगी.

कांग्रेस का आरोप है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने कृषि, रोज़गार और सामाजिक क्षेत्र की उपेक्षा की.

दृष्टि-पत्र तैयार करने के लिए बनी विशेष समिति के अध्यक्ष प्रणव मुखर्जी का कहना था कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में पाँच प्रतिशत की दर से बेरोज़गारी बढ़ेगी.

कांग्रेस देश में 10 प्रतिशत के विकास दर का वादा कर रही है.

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा ने कांग्रेस के दृष्टि-पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस मूल रुप से अपने ऊपर ही आरोप लगा रही है.

भाजपा प्रवक्ता अरुण जेटली का कहना था कि यदि गाँवों में बिजली नहीं हैं और पानी नहीं है और सड़कें नहीं हैं तो इसका दोष कांग्रेस पर ही है.

उन्होंने दृष्टि-पत्र को दृष्टि विहीन बताया और कहा कि कांग्रेस 34 सालों बाद एक बार फिर ग़रीबी हटाने के नाम पर वोट माँग रही है.

वाजपेयी के ख़िलाफ़ जेठमलानी

चर्चित वक़ील और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी ने फ़ैसला किया है कि वे लख़नऊ से यानी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे.

कई दिन पहले उन्होंने कहा था कि यदि विपक्ष चाहे तो वह वाजपेयी के ख़िलाफ़ साझा उम्मीदवार हो सकते हैं.

कभी वाजपेयी मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे जेठमलानी का कहना है कि वह इस सरकार को बदलना चाहते हैं जो लोकतंत्र का तकाज़ा भी है.

बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि प्रेक्षक मानते हैं कि राम जेठमलानी वाजपेयी को हरा दें ऐसा तो दिखता नहीं लेकिन वह अच्छी टक्कर देंगे और तरह-तरह के असुविधाजनक सवाल पूछ कर वाजपेयी जी को परेशानी में रखेंगे.

दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि इसकी संभावना कम ही है कि जेठमलानी विपक्ष के साझा उम्मीदवार हो पाएँगे.

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