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पटना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने अपराधी उम्मीदवारों पर पटना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. पटना हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह उन सभी निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव रद्द करने पर विचार करे जहाँ से जेल में बंद व्यक्ति चुनाव लड़ रहा है और उसे मतदान करने का अधिकार नहीं. पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यी खंडपीठ ने कहा, "चूँकि अब चुनाव आख़िरी दौर में हैं इस स्थिति में हाई कोर्ट का निर्देश लागू करना व्यवहारिक नहीं." खंडपीठ की अगुआई मुख्य न्यायाधीश एस राजेंद्र बाबू ने की. बाद में फ़ैसला हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस सवाल पर अभी कोई फ़ैसला नहीं सुनाया है जिसमें कहा गया था कि जिस व्यक्ति को मतदान करने का अधिकार नहीं वह चुनाव कैसे लड़ सकता है.
सुप्रीम कोर्ट इस पर बाद में फ़ैसला सुनाएगा. पटना हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह उन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव रद्द करने पर विचार करे जहाँ वैसे लोग चुनाव लड़ रहे हैं जो जेल में हैं और चुनावी क़ानून के तहत उनके मतदान का अधिकार निलंबित कर दिया जाता है. पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग की मुख्य आपत्ति यह थी कि अनुच्छेद 329 बी के तहत एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद अदालतों के इसमें हस्तक्षेप करने पर रोक है. पटना हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस पर भी विचार करने को कहा था कि जहाँ भगोड़े घोषित हो चुके लोग मतदान करें वहाँ भी चुनाव रद्द कर दिए जाएँ. |
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