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बोनस पर भारी टैक्स का प्रस्ताव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी संसद की प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक को मंज़ूरी दी है जिसमें प्रावधान है कि आर्थिक सहायता लेने वाली कंपनियाँ अगर बोनस देती हैं तो उस पर 90 फ़ीसदी टैक्स देना होगा. बीमा कंपनी एआईजी ने पिछले दिनों अपने कर्मचारियों को साढ़े सोलह करोड़ डॉलर बोनस बाँटे थे. बोनस पाने वाले में वो लोग भी शामिल थे जिनकी वजह से कंपनी बंद होने की कगार पर पहुँच गई थी. इस ख़बर के बाद प्रशासन बहुत नाराज़ था और यह विधेयक इस उदाहरण के बाद लाया गया है. प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के कई सदस्यों ने इसका विरोध किया है. संवाददाताओं का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह क़ानून अमल में आ पाएगा या नहीं क्योंकि अभी इसे सीनेट से पारित करवाना होगा और फिर दोनों सदनों को स्वीकार्य विधेयक का एक प्रारुप तैयार करना होगा. पैसा वापस चाहिए कांग्रेस में इस मुद्दे पर हंगामे जैसा नज़ारा देखने को मिला और भारी भरकम बोनस पर 90 प्रतिशत आयकर लगाने के लिए हुए इस मतदान में आम लोगों का वो ग़ुस्सा भी प्रतिबिंबित होता है जो उन्होंने पिछले दिनों विशालकाय बीमा कंपनी एआईजी के उच्चाधिकारियों को भारी बोनस मिलने पर दिखाया है. यह मतदान दरअसल उन कंपनियों के बारे में हुआ जिन्हें डूबने से बचाने के लिए सरकार ने आर्थिक सहायता दी है, उसके बावजूद ऐसी कंपनियों ने अपने उच्चाधिकारियों को भारी-भरकम बोनस बाँटा है. ख़बरें हैं कि एआईजी कंपनी ने अपने उच्चाधिकारियों को क़रीब साढ़े सोलह करोड़ डॉलर का बोनस दिया है. जबकि एआईजी कंपनी को डूबने से बचाने के लिए सरकार ने 170 अरब डॉलर की रक़म झोंकी है और यह धन दरअसल करदाताओं का था. भारी बोनस राशि पर 90 प्रतिशत आयकर लगाने वाले विधेयक को मंज़ूरी दिलाने की इस मुहिम में रिपब्लिकन पार्टी के 85 सदस्य भी डेमोक्रेट्स के साथ नज़र आए. प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कहा कि हम अपना धन वापिस चाहते हैं ताकि उसे करदाताओं को वापिस लौटाया जा सके. स्पीकर नैंसी पेलोसी का कहना था, "यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है. जिन लोगों की नाकामियों की वजह से ही विशालकाय कंपनियाँ धराशायी होती हैं उन्हें मोटे-मोटे बोनस दिए जाएँ और आम करदाता को बदले में मिलें बड़े-बड़े बिल." विरोध हालाँकि इस क़दम का रिपब्लिकन पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने यह कहते हुए विरोध भी किया था कि 90 प्रतिशत आयकर लगाने का यह क़दम दरअसल संकट का सामना कर रही कंपनियों के प्रशासन में हुई गड़बड़ियों की तरफ़ से ध्यान हटाने की एक चाल के तौर पर उठाया गया है. भारी-भरकम बोनस और उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों की आमदनी पर 90 प्रतिशत कर लगाने के इस विधेयक जैसे ही प्रस्ताव पर सीनेट में भी विचार किया जा रहा है और अगर वहाँ भी इसे मंज़ूरी मिल जाती है तो दोनों सदन मिलकर कोई मिला-जुला रास्ता निकालेंगे. यह शर्त उन सभी कर्मचारियों पर लागू होगी जिनकी आय ढाई लाख डॉलर तक है और उन कंपनियों पर भी जिन्हें संकट से उबारने के लिए सार्वजनिक धन से पाँच अरब डॉलर से ज़्यादा की रक़म मिली हो. राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यह विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए कहा है कि इसमें आम लोगों का ग़ुस्सा भी झलकता है. ओबामा प्रशासन पहले ही कह चुका है कि एआईजी कंपनी ने साढ़े सोलह करोड़ डॉलर का जो बोनस अपने अधिकारियों को बाँटा है, उसे वापिस लेने की कोशिश की जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें बोनस बाँटने पर बिफरे ओबामा17 मार्च, 2009 | पहला पन्ना 'मंदी में रेवड़ियाँ बाँटना शर्मनाक'29 जनवरी, 2009 | पहला पन्ना प्रतिनिधि सभा में नए पैकेज को हरी झंडी14 फ़रवरी, 2009 | कारोबार तीन बैंकों के लिए 3800 करोड़ की राशि11 फ़रवरी, 2009 | कारोबार अमरीकी सांसद राहत पैकेज पर सहमत07 फ़रवरी, 2009 | कारोबार अमरीका, जर्मनी में आर्थिक पैकेज की गूँज13 जनवरी, 2009 | कारोबार 'पैकेज के स्वागत के साथ चेतावनी भी'20 दिसंबर, 2008 | कारोबार अमरीकी कार कंपनियों ने माँगी राहत19 नवंबर, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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