BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 14 फ़रवरी, 2009 को 00:24 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
प्रतिनिधि सभा में नए पैकेज को हरी झंडी
बराक ओबामा
नए पैकेज से 35 लाख रोज़गार अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है
अमरीका की प्रतिनिधि सभा में आर्थिक मंदी से निपटने के लिए प्रस्तावित आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के नए प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी गई है.

प्रतिनिधि सभा में इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब इसे कुछ ही घंटों में सीनेट के सामने मतदान के लिए रखा जा रहा है.

सीनेट में भी इस प्रोत्साहन पैकेज को पारित कराने के बाद ही राष्ट्रपति बराक ओबामा इसपर हस्ताक्षर कर सकेंगे.

संसद के दोनों सदनों में इसपर सहमति बनने के बाद प्रस्ताव का एक अंतिम प्रारूप तैयार किया गया था जिसे सीनेट और प्रतिनिधि सभा के सामने मतदान के लिए रखा जाना था.

प्रस्तावित 787 अरब अमरीकी डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज पर शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा में जब मतदान हुआ तो रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने विरोध स्वरूप मतदान का बहिष्कार किया.

और तो और, सात डेमोक्रेट प्रतिनिधि भी इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान कर गए. बावजूद इसके प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा में पारित हो गया.

हालांकि राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दोनों ही राजनीतिक दलों, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों से अपील की थी कि उन्हें इस प्रोत्साहन पैकेज के लिए सभी के समर्थन की आवश्यकता है.

ओबामा का प्रस्ताव

जनवरी में राष्ट्रपति पद की कुर्सी संभालने के बाद से बराक ओबामा के सामने अमरीकी अर्थव्यवस्था को आर्थिक मंदी की चपेट से निकालना ही सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ा है.

बराक ओबामा की ओर से इसी के मद्देनज़र इस आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का प्रस्ताव सदन के समक्ष रखा गया है.

बराक ओबामा चाहते थे कि पैकेज जल्द से जल्द पारित हो जाए ताकि प्रस्ताव को उनके समक्ष हस्ताक्षर के लिए लाया जा सके.

राष्ट्रपति ओबामा का तर्क है कि इससे बाज़ार में विश्वास बहाल करने में मदद मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा है कि कर्ज़ न मिलने का संकट वास्तविक है और अभी ये ख़त्म नहीं हुआ है.

इस प्रस्ताव के समर्थन के लिए सभी दलों से अपील कर रहे ओबामा के पास दलील है कि इस पैकेज की मदद से अमरीका में रोज़गार के 30 लाख से ज़्यादा अवसर पैदा किए जा सकेंगे.

पर कुछ सांसद ओबामा के तर्क से सहमत नहीं है. उनका कहना है कि करों में कटौती पर्याप्त नहीं है और ऐसे में आर्थिक पैकेज से राहत कम, कर्ज़ ज़्यादा बढ़ने वाला है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>