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खाद्यान्न की कीमत से 60 प्रतिशत प्रभावित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के एक अध्ययन में पाया गया है कि 26 देशों में लगभग 60 प्रतिशत लोग खाद्यान्न और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से ख़ासे प्रभावित हुए हैं. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के दुनिया भर में किए गए इस अध्ययन में जहाँ लगभग सभी देशों में बढ़ती कीमतों का प्रभाव देखा गया वहीं इससे ग़रीब देशों में सबसे अधिक समस्याएँ पैदा हुईं. ये सर्वेक्षण आठ जुलाई और 15 सितंबर के बीच, भारत समेत 26 देशों में 27 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ बातचीत करने के बाद हुआ और इस कार्यक्रम का संयोजक प्रोग्राम ऑन इंटरनेशनल पॉलिसी एटिट्यूड्स था. अध्ययन के मुताबिक जिन देशों में सर्वेक्षण हुआ उनमें से फ़िलिपींस सबसे ज़्यादा प्रभावित पाया गया. संभावना है कि अब खाद्यान्न की कीमतों में कुछ गिरावट आएगी क्योंकि तेल की गिरती कीमत का असर उर्वरक की कीमत पर पड़ेगा. अनाज खाने में कटौती अध्ययन के अनुसार इस साल विकासशील देशों में अनेक लोग खाद्यान्न की बढ़ती कीमत के कारण कम अनाज खाने को मजबूर हुए. फ़िलिपींस और पानामा में अध्ययन में भाग लेने वाले 63 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने खाद्यान्न के सेवन में कटौती की है. इन 26 देशों में 43 प्रतिशत का कहना था उन्होंने अपने खान-पान में बदलाव किए जबकि मिस्र में 67 प्रतिसत, कीनिया में 61 प्रतिशत और नाइजीरिया में 58 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने खाने में कटौती की है. सरकारों, नेताओं से नाख़ुश इस सर्वेक्षण से ये भी स्पष्ट हुआ कि दुनिया में लगभग 70 प्रतिशत जनता अपनी सरकारों से इसलिए नाख़ुश थी क्योंकि उन्होंने खाद्यान्न की कीमतें कम रखने के सरकारों के उठाए कदमों को अपर्याप्त माना. मिस्र में 88 प्रतिशत, फ़िलिपींस में 86 प्रतिशत और लेबनान में 85 प्रतिशत लोगों ने अपने नेताओं के बारे में नाराज़गी ज़ाहिर की है. विकसित देशों में सर्वेक्षण में भाग लेने वालों में फ्रांस के 79 प्रतिशत लोगों ने अपनी सरकार से नाराज़गी व्यक्त की है. ऊर्जा के संबंध में 26 देशों के 60 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे बढ़ती कीमतों से ख़ासे प्रभावित हुए. इसमें फ़िलिपींस फिर सबसे ज़्यादा प्रभावित दिखा जहाँ 96 प्रतिशत लोगों ने, मिस्र में 93 प्रतिशत लोगों ने, इंडोनेशिया में 84 प्रतिशत ने, कीनिया में 83 प्रतिशत लोगों ने और मेक्सिको में 81 प्रतिशत ने कहा कि वे ऊर्जा की बढ़ती कीमत से प्रभावित हुए हैं. |
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