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एनएसजी की बैठक में सहमति नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) की बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई है. दो दिनों तक चली बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि निकट भविष्य में एक बार फिर इस मुद्दे पर एनएसजी की बैठक होगी. बयान में कहा गया है- सदस्य देशों की बैठक में रचनात्मक बातचीत हुई और विचारों का आदान-प्रदान हुआ. इस बात पर सहमति हुई है कि निकट भविष्य में एक बार फिर बैठक होगी. एनएसजी की मंज़ूरी मिलने के बाद ही अमरीकी संसद में यह समझौता रखा जाएगा. अमरीकी संसद की मंज़ूरी मिलने के बाद ही यह समझौता प्रभावी हो पाएगा. माना जा रहा है कि चार-पाँच सितंबर को एनएसजी के सदस्य देश इस मुद्दे पर एक बार फिर बैठक करेंगे. अमरीकी विदेश उप मंत्री जॉन रूड ने कहा है कि वे सदस्य देशों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में काम करेंगे. परमाणु समझौते को एनएसजी की मंज़ूरी मिलने के बाद ही भारत परमाणु ईंधन के व्यापार में शामिल हो जाएगा. जो अमरीका के साथ परमाणु समझौते का आधार है. आपत्तियाँ गुरुवार सुबह एनएसजी की बैठक शुरु हुई. भारत ने एनएसजी के सदस्य देशों के सामने अपना पक्ष रखा. लेकिन गुरुवार शाम तक ये स्पष्ट हो चुका था कि कई सदस्य देशों को इस समझौते पर आपत्ति है. दरअसल भारत ने अभी तक परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है. यही बात एनएसजी के कई सदस्य देशों को नागवार गुज़र रही है. इन देशों का कहना है कि भारत की ओर से आगे परमाणु परीक्षण न करने की औपचारिक गारंटी मिलनी चाहिए. अमरीका ने एनएसजी की बैठक शुरू होने से पहले परमाणु समझौते पर उसके लिए एक मसौदा तैयार किया था. अब भारत का कहना है कि वह परमाणु परीक्षण के मुद्दे पर एनएसजी की आपत्तियों के बाद मसौदे में कोई बदलाव नहीं चाहता. जबकि एनएसजी इस मसौदे में बदलाव करना चाहता है. शुक्रवार को भी एनएसजी की बैठक में इन्हीं आपत्तियों पर चर्चा होती रही. कोशिश वैसे भारत आगे कोई परमाणु परीक्षण न करने की बात कहता रहा है लेकिन इस मुद्दे पर उसने किसी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
एनपीटी के अलावा भारत ने व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि (सीटीबीटी) पर भी हस्ताक्षर नहीं किया है. बैठक में ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और स्विट्ज़रलैंड को इस पर कड़ी आपत्ति थी कि भारत की ओर से औपचारिक आश्वासन मिले बिना उसे एनएसजी की ओर से परमाणु ईंधन के व्यापार के लिए हरी झंडी नहीं मिलनी चाहिए. वियना बैठक में मौजूद अमरीकी विदेश उप मंत्री जॉन रूड ने कहा कि वे एनएसजी के सदस्य देशों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा, "मैं बहुत आशावादी हूँ. हम इस अहम लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करना जारी रखेंगे." परमाणु समझौते को एनएसजी की मंज़ूरी दिलाने के लिए अमरीका पुरज़ोर कोशिश कर रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें एनएसजी में समर्थन जुटाने की तैयारी23 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस धोखा देने का सवाल ही नहीं: मुखर्जी 21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'सरकार जनता को गुमराह न करे'21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस क्या है भारत-आईएईए समझौते में?10 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'डील के भीतर कोई डील नहीं है'09 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस '...तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा'05 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस परमाणु करार में आए उतार-चढ़ाव04 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस कलाम ने कहा, समझौता देशहित में03 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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