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सबसे बड़ी समस्या है पैसा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नाइजीरिया के आम लोगों की आवाज़ में ग़ुस्सा, क्षोभ और बेबसी को आप नज़र अंदाज नहीं कर सकते हैं. क्या सबसे बड़ी समस्या है उनके जीवन की ये पूछने पर उनका जवाब होता है पैसा...पैसा...पैसा. दुनिया में तेल का व्यापार कर रहे बड़े देशों की सूची में होने के बावजूद आख़िर नाइजीरिया में पैसे की कमी? आखिर सारा पैसा जाता कहाँ है. लोग कहते हैं पता नहीं, हमने तो नहीं देखा. ये तो सरकार ही बताएगी कि कहाँ जाता है हमारा पैसा...कौन लूटता है. एक अनुमान है कि अगले दस साल मे 500 अमरीकी डालर जिन तेल संपन्न अफ्रीकी देशों के ख़ज़ाने में जाएगा उनमें नाइजीरिया सबसे आगे है. पर सवाल यह है कि क्या यह पैसा देश और आम लोगों की बेहतरी में इस्तेमाल होगा. समस्या की जड़ भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में सरकार और समाज के बीच एक मह्त्वपूर्ण कड़ी का काम कर रही संस्था कोयलिशनस फ़ॉर चेन्ज के फेबियन ओकोये कहते हैं, भष्ट्रचार इस देश की समस्याओं की जड़ है. उनका कहना है, भष्ट्राचार नाइजीरिया के विकास में सबसे बड़ी बाधा है. इसने देश के मूलभूत ढाँचे को तोड़ दिया है. हमें उम्मीद है कि अगर हम इस राक्षस से सही तरीके से निपटें तो देश की बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जाएगा. अंतरराष्ट्रीय सस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने इस देश को दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में रखा है. क़ानून लागू करने वाले अधिकारी ख़ुद मानते है कि यहाँ की तेल से कमाई जा रही सालाना राशि का आधा लूट लिया जाता है. हर दिन लगभग डेढ़ लाख बैरेल कच्चे तेल की चोरी हो जाती है. आश्चर्य नहीं कि नाइजीरिया की लगभग आधी आबादी ग़रीब है. यहाँ के लोग अपना गुज़ारा एक डॉलर प्रतिदिन से कम में करते हैं. शायद यही वजह थी कि जब 1999 में सैन्य शासन हटा और ओलुसेगुन ओबासैन्जो राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इकोनॉमिक एंड फ़ाइनेंशियल क्राइम कमीशन यानी आर्थिक और वित्तीय अपराध कमीशन बनाया था. कमीशन की पड़ताल की गाज कई दिग्गज नेताओं पर भी पड़ी. दो मंत्रियों को उनके भ्रष्ट आचरण के लिए निष्कासित किया गया, कुछ पर जाँच अभी भी चल रही है.
लेकिन इस कमीशन की मंशा पर भी सवाल उठे. कहा जाने लगा कि यह कमीशन राजनीति से प्रेरित है. विवाद के बाद इसी सप्ताह कमीशन की नई चेयरपर्सन का चुनाव भी हुआ है. अबुजा में जाने माने टीकाकार और इस क्षेत्र मे काम कर रहे चीफ़ पैडी नजोकू कहते हैं कि भष्ट्राचार को जड़ से मिटाने की मंशा अगर सरकार की होगी तो वो कुछ और ठोस कदम उठाएगी. ये समस्या तो शायद उतनी बड़ी है जितना बड़ा देश है. लेकिन इससे निपटने के लिए ज़रूरी है कि आप उन बातो पर ध्यान दें जो इसका कारण हैं. कोई भी देश जिसने इसके ख़िलाफ़ जंग जीती है उसने अपने लोगों के लिए एक सामजिक सुरक्षा नीति यानि सोशल सेक्युरिटी स्कीम बनाई है. यह नीति पैसा जोड़ने की पूरी ज़रूरत को ही बेकार कर देती है. केवल कमीशन बनाने और कुछ नेताओ को सज़ा देने से इसका हल नही है. बहरहाल किसी भी देश के भ्रष्टाचार की बात होती है तो भारत के साथ तुलना करना आसान हो जाता है. यहाँ रह रहे भारतीयों से जब हमने यहाँ के भष्ट्रचार के बारे में पूछा तो उनका साफ़ कहना था कि भारत और नाइजीरिया में कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं है. ये ज़रूर है कि शायद लोग इसे ज़िंदगी का हिस्सा मानने लगे है. एक ऐसा रोग जिसके साथ जीना सीखना पड़ेगा. एक ने हँसते हुए भी कहा कि नाइजीरिया में रिश्वत दो तो आपको भरोसा है कि काम हो जाएगा, लेकिन भारत में तो रिश्वत के बाद भी कोई भरोसा नहीं. कम से कम बेईमानी भी यहाँ ईमानदारी से होती है. भ्रष्ट्राचार और ज़िंदगी पता नहीं इतना भर किसी भी देश के लिए काफ़ी है, लेकिन सीफ़ोर सी के फ़ेबियन कहते हैं, ये जड़ से समाप्त होगी इसका उन्हें भरोसा है बस कुछ बाते हैं जिन्हें सरकार को सुनिश्चत करना होगा.
अभी क़ानून है कि किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कमीशन तभी क़दम उठाएगा जब किसी ने उसकी याचिका दी होगी. ऐसा नहीं होना चाहिए. मुझे लगता है नाइजीरिया में बहुत कुछ हो रहा है और पिछले दिनो जो नेताओं और सरकारी संस्थाओं पर गाज गिरी है उससे लोगों में भरोसा बढ़ा है कि बातें पुराने दिनों जैसी नहीं रहीं. शायद उम्मीद करना निराश न करे. लेकिन तब तक यहाँ का आम आदमी ये सवाल और गुहार करता रहेगा ..कि हमारा पैसा कहाँ गया... |
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