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शुक्रवार, 09 मई, 2008 को 11:19 GMT तक के समाचार
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पश्चिमी बेरूत पर हिज़बुल्लाह का क़ब्ज़ा
बेरूत में रफ़ीक हरीरी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जाती एक सड़क
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जाने वाले बहुत से रास्ते बंद पड़े हैं
लेबनान में शिया चरमपंथी संगठन हिज़बुल्लाह के लड़ाकों ने राजधानी बेरूत के पश्चिमी क्षेत्र में काफ़ी बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है और पश्चिम समर्थक मानी जाने वाली सरकार के समर्थकों को वहाँ से बाहर निकाल दिया है.

हिज़बुल्लाह के वफ़ादार लड़ाकों और इसके शिया विपक्षी सहयोगियों ने सरकार समर्थक मीडिया के दफ़्तरों को भी बलपूर्वक बंद कराया है.

सोमवार को लेबनान सरकार ने हिज़बुल्लाह के दूरसंचार नेटवर्क को बंद कर दिया जिसके बाद यह लड़ाई भड़क उठी और तीन दिन से चल रही इस लड़ाई में कम से कम 11 लोग मारे जा चुके हैं और उनमें मुख्य रूप से आम लोग हैं.

लेबनान की पश्चिम समर्थक कहे जाने वाले सत्तारूढ़ गठबंधन में एक दल के नेता साद हरीरी के कई मीडिया दफ़्तरों को शुक्रवार को ख़ाली करा दिया गया और उन्हें बंद कर दिया गया क्योंकि उन्हें हिज़बुल्ला के समर्थकों ने निशाना बनाया.

जब बंदूकधारियों ने एक टेलीविज़न स्टेशन - फ्यूचर न्यूज़ को अपने क़ब्ज़े में ले लिया तो वहाँ सेना भेजी गई. बंदूकधारियों ने अल मुस्तक़बल नामक अख़बार के दफ़्तर के एक हिस्से को आग भी लगा दी. साद हरीरी का रेडियो स्टेशन भी ख़ामोश है.

हिंसक हालात को देखते हुए यह समझौता हुआ कि लेबनान की सेना इन मीडिया दफ़्तरों को अपने क़ब्ज़े में ले लेंगी और उनकी हिफ़ाज़त करेंगी बशर्ते कि वे प्रसारण बंद कर दें.

लेबनानी सेना के कमांड ने आगाह किया है कि अगर बेरूत में यह संकट ज़्यादा दिन चला तो सेना की एकता के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है.

बेरूत के मध्य और पश्चिमी इलाक़ों में भी साद के हरीरी के समर्थक जिन दफ़्तरों में इकट्ठा थे उनमें से भी कुछ में आग लगा दी गई जिसके बाद सभी लोग वहाँ से चले गए.

बेरूत में एक लड़का
तीन दिन की लड़ाई में 11 लोग मारे गए हैं

शुक्रवार को जैसे ही दिन शुरू हुआ तो लड़ाई कुछ धीमी पड़ती नज़र आई क्योंकि उससे पहले रात भर गोलीबारी और विस्फोट जारी रहे.

लेबनानी अधिकारियों ने कहा है कि रॉकेट से छोड़ा गया एक गोला पश्चिमी बेरूत में साद हरीरी के घर की एक सीमा बाड़ पर आकर गिरा. साद हरीरी लेबनान के शीर्ष सुन्नी राजनीतिज्ञों में से एक हैं और समझा जाता है कि जब यह गोला आकर गिरा, वह अपने घर में ही थे.

बेरूत में इस लड़ाई को देखते हुए तमाम बंदरगाहों को बंद कर दिया गया है और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को पहुँचने वाली तमाम सड़कों को टायर वग़ैरा जलाकर अवरुद्ध कर दिया गया है.

ग़लतफ़हमी

बेरूत में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम मुईर का कहना है कि हिज़बुल्लाह के लड़ाके शहर में बेरोक-टोक घूम रहे हैं और ये हालात लेबनान में सत्तारूढ़ पश्चिम समर्थित सरकार के लिए एक भारी झटका समझे जा रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि लेबनान सरकार ने हिज़बुल्लाह सरकार के दूरसंचार नेटवर्क को बंद करने का फ़ैसला करके एक ग़लती कर दी है.

दरअसल सरकार ने उन दूरसंचार लाइनों को ग़ैरक़ानूनी क़रार दे दिया था जो दक्षिण और पूर्वी लेबनान और बेरूत के दक्षिणी हिस्से में बिछी हुई तीं और वहाँ पर हिज़बुल्लाह का दबदबा माना जाता है.

हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरुल्लाह ने गुरूवार को दिए एक भाषण में सरकार के इस क़दम को "युद्ध की घोषणा" बताया था. साद हरीरी ने इस फ़ैसले को एक "ग़लतफ़हमी" क़रार देते हुए कोई समझौता करने की पेशकश की ती और कहा था कि इस मामले में अंतिम फ़ैसला लेने का अधिकार सेना को होगा.

साद हरीरी ने दोनों ही तरफ़ के लड़ाकों से सड़कों से हट जाने की गुज़ारिश की ताकि "लेबनान को तबाही से बचाया जा सके." हरीरी ने शेख हसन नसरुल्लाह के साथ मुलाक़ात करने की भी मंशा ज़ाहिर की है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी लेबनान में प्रतिद्वंद्वी लड़ाके दलों से लड़ाई तुरंत रोक ने का अनुरोध किया है. संवाददाताओं का कहना है कि अब जो लड़ाई चल रही है वो 1975 से 1990 तक चले ग़ृहयुद्ध के बाद सबसे ख़राब स्थिति नज़र आती है.

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