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नीलाम हो रही है शाहजहाँ की कटार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कभी वो कटार मुग़ल बादशाह शाहजहाँ की सबसे पसंदीदा हथियारों की श्रेणी में थी और उनके ख़ास शाही हथियारों में शामिल थी. अब न बादशाह रहे और न उनकी वो कटार ही भारत की सीमाओं में रह सकी. ख़बर है कि वो कटार नीलाम हो रही है. पर दुनिया को ताजमहल देने वाले शाहजहाँ के वंशजों के पास भी शायद इस कटार को ख़रीद पाने भर के पैसे न हों. नीलाम करने वाली संस्था, बोनहैम्स ने सोने के काम वाली इस कटार की नीलामी के लिए क़रीब ढाई करोड़ से चार करोड़ रूपए तक आंकी है. वर्ष 1629-30 के बीच बनी बादशाह की इस सोने से मढ़ी कटार की नीलामी लंदन में गुरूवार को की जाएगी. यह कटार इस्लामी, भारतीय और दक्षिण-पूर्वी कलाकृतियों के संग्रहकर्ता दिवंगत जॉक देसेफ़ैंस के संग्रह का एक हिस्सा रही है. जॉक देसेफ़ैंस ने अपने जीवन के पाँच दशक विभिन्न कलाकृतियों को इकट्ठा करने में गुज़ारे थे. बोनहैम्स ने जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की उसके मुताबिक कटार के पत्तियों पर शाहजहाँ की शासकीय उपाधि, उनकी जन्मतिथि और जन्मस्थान के बारे में लिखा हुआ है. इससे पता चलता कि नीलामी की जाने वाली कटार शाहजहाँ से संबंधित है. प्रसिद्ध इतिहासकार विलियम डेलरिंपल ने बोनहैम्स की पत्रिका में लिखा है, "बादशाह से मिलने आने वाले कई लोगों ने उनकी सुंदर और बहुमूल्य वस्तुओं से प्रेम के बारे में लिखा है." सुंदर कलाकृतियों से विशेष अनुराग रखने वाले शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज़ महल की याद में विश्वप्रसिद्ध ताजमहल बनवाया था. | इससे जुड़ी ख़बरें सॉदबी ने कवच की नीलामी रोकी07 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना भारत ने हासिल किया गांधी का पत्र04 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना संपत्ति के साथ नौकरी की नीलामी!18 मार्च, 2008 | पहला पन्ना ऑक्सफ़ोर्ड पुस्तकालय की बोली31 मई, 2006 | पहला पन्ना लिंकन का पत्र रिकॉर्ड दाम पर बिका04 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना 26 लाख डॉलर में बिकी 'पित्ज़ा' वेबसाइट06 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना मितराँ के सामान की नीलामी29 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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