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सॉदबी ने कवच की नीलामी रोकी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रसिद्ध नीलामी घर सॉदबी ने उस कवच की नीलामी से अपना हाथ खींच लिया है जिसके बारे में कहा जा रहा था कि वो सिखों के दसवें और अंतिम धार्मिक गुरू गोविंद सिंह की हो सकती है. ये नीलामी बुधवार को होने वाली थी. भारत में सिखों ने प्रस्तावित नीलामी के विरोध में प्रदर्शन किए थे. उनका कहना है कि इस कवच को अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के संग्रहालय में रखा जाए. सॉदबी ने कहा है कि बेचने वाले के आग्रह पर उन्होंने कवच की नीलामी को रोक दिया है. हालांकि उसने बेचने वाले का अता-पता नहीं बताया है. सॉदबी ने एक बयान जारी कर कहा है कि बेचने वाले ने संस्था से कहा था कि 'सिख समुदाय के किसी योग्य सदस्य' के हाथों कवच 'अधिग्रहण' की व्यवस्था करे. सॉदबी ने कवच को 18वीं सदी के उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान क्षेत्र का बताया है. इसकी क़ीमत उसने क़रीब आठ लाख से दस लाख के बीच बताई है. सबूत वैसे पिछले हफ़्ते सॉदबी ने कहा था कि उसके पास इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि कवच कभी गुरू गोविंद सिंह से संबंधित रहा हो. सॉदबी ने एक बयान में कहा, "हमने कवच-कुंडल को लेकर शोध किया लेकिन हमें ऐसी कोई सबूत या जानकारी नहीं मिली जो यह साबित कर सके कि वह गुरू गोविंद सिंह से संबंधित रही हो." पटना में जन्मे गुरू गोबिंद सिंह धार्मिक गुरू होने के साथ साथ एक कवि और योद्धा भी थे. कवच की नीलामी को लेकर भारत में पटना और अमृतसर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इससे सॉदबी पर नीलामी को रोकने का दबाव था. | इससे जुड़ी ख़बरें गांधीजी के पत्र की नीलामी रोकी गई02 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना चे ग्वेरा के बालों की नीलामी26 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना मितराँ के सामान की नीलामी29 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना लिंकन का पत्र रिकॉर्ड दाम पर बिका04 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना 26 लाख डॉलर में बिकी 'पित्ज़ा' वेबसाइट06 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना संपत्ति के साथ नौकरी की नीलामी!18 मार्च, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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