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लिंकन का पत्र रिकॉर्ड दाम पर बिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के दिवंगत राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का लिखा हुआ एक पत्र न्यूयॉर्क में हुई सबसे महंगी नीलामी में रिकॉर्ड 34 लाख डॉलर यानी क़रीब साढ़े 13 करोड़ रूपए में बिका. अमरीका में किसी पांडुलिपि या हाथ से लिखे दस्तावेज़ के लिए अभी तक लगी यह सबसे बड़ी बोली बताई जा रही है. यह पत्र 195 बच्चों की लिंकन को भेजी गई एक याचिका का जवाब है जिसमें बच्चों ने लिंकन से अमरीका के सभी गुलाम बच्चों को आज़ादी दिलवाने की गुहार लगाई थी. इसके जवाब में लिंकन ने 1864 में यह ख़त लिखा था. नीलामी कराने वाली संस्था ‘सोदबीज़’ ने बताया कि इसे एक अमरीकी ने टेलीफोन पर बोली लगाकर ख़रीदा. ये ख़त नीलामी में रखे गए अमरीका की दूसरी ऐतिहासिक हस्तियों के क़रीब 100 हाथ से लिखी पांडुलिपियों के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा. नीलामी के दूसरे आकर्षणों में जॉर्ज वाशिंगटन का लिखा दस्तावेज़, लिंकन का मशहूर गेटिस्बर्ग के संबोधन वाले दिन दिया गया ऑटोग्राफ़, और अमरीका के छठे राष्ट्रपति जॉन क्वैंसी एडम्स की गृहयुद्ध भविष्यवाणी प्रमुख रहे. नीलामी करनेवाली संस्था ने कहा कि सबसे महंगी लिपि लिंकन का भगवान, ग़ुलामी और मुक्ति पर दिया गया वक्तव्य ही रहा. 'तुम्हारे ख़त में...' नीलाम हआ लिंकन का ख़त पांच अप्रैल 1864 को उस याचिका पत्र के जवाब में लिखा गया था जिसमें 195 बच्चों ने देश में छोटे बच्चों को ग़ुलामी से आज़ाद करने की गुहार लगाई गई थी. जवाब में राष्ट्रपित ने लिखा, “इन छोटे बच्चों को बताएं, मैं बहुत खुश हूं कि इनके बालमन ईमानदारी से भरे हैं और उदार हैं. हलांकि मेरे पास वो सब देने की शक्ति नहीं है जिसकी मांग की गई है पर मुझे भरोसा है कि ईश्वर उनकी इच्छा पूरी करेंगे.” 1862 और 1863 में लिंकन ने दो शासकीय आदेश दिए थे जिसे ‘इमैंसिपेशन प्रोक्लेमेशन’ के तौर पर जाना जाता है. इसके तहत संघीय राज्य क्षेत्रों में रहने वाले सभी ग़ुलामों को मुक्त किया जाना था. लेकिन 1865 तक कोई भी मुक्त नहीं हुआ जब तक ग़ुलामी को नष्ट करने के लिए अमरीकी संविधान में 13वां संशोधन नहीं हुआ. लिंकन की इसी साल की शुरूआत में हत्या कर दी गई. लिंकन की हस्तलिपि का पिछला रिकॉर्ड दाम 3.1 लाख डॉलर था. वह गृह युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की योजना के भाषण की रूपरेखा थी. | इससे जुड़ी ख़बरें नहीं रुकेगी हुसैन के चित्रों की नीलामी19 मार्च, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस गांधीजी के पत्र की नीलामी रोकी गई02 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना भारत ने हासिल किया गांधी का पत्र04 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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