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भारत ने हासिल किया गांधी का पत्र | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महात्मा गांधी के जिस हस्तलिखित पत्र की नीलामी स्थगित कर दी गई थी अब वह भारत सरकार को मिल गई है. मंगलवार को इसकी नीलामी होनी थी लेकिन नीलामी आयोजित करने वाली कंपनी क्रिस्टीज़ ने यह कहते हुए नीलामी रोक दी थी कि इस राष्ट्रीय धरोहर को भारत सरकार हासिल करना चाहती है. महात्मा गांधी ने यह पत्र अपनी हत्या से 19 दिन पहले लिखा था और एक स्विस संग्रहकर्ता के संग्रह में यह चिट्ठी थी जिसे नीलाम करने की क्रिस्टीज़ ने घोषणा की थी. क्रिस्टीज़ ने कहा था कि उसे इस बात की ख़ुशी है कि उसने पत्र के मालिक और भारत सरकार के बीच एक समझौता करा दिया है जिसके तहत पत्र भारत को मिल जाएगा. लेकिन भारत सरकार या क्रिस्टीज़ ये बताने को तैयार नहीं है कि इस पत्र को हासिल करने के लिए भारत सरकार ने कितनी रक़म अदा की. माना जा रहा है कि इस पत्र पर नौ हज़ार से 12 हज़ार पाउंड के बीच की बोली लगाई जाती यानी 10 लाख रुपए तक इसकी क़ीमत हो सकती थी. गांधी जी का पत्र एल्बिन श्राम कलेक्शन का हिस्सा था जिसमें सिगमंड फ्रायड, विंस्टन चर्चिल, चार्ल्स डिकिंस, आइजैक न्यूटन जैसी हस्तियों के लिखे पत्र शामिल हैं. एल्बिन श्राम चेक गणराज्य में 1926 में पैदा हुए थे, वे ऑस्ट्रियाई माता-पिता की संतान थे और स्विट्ज़रलैंड में रहते हुए उन्होंने इन चिट्ठियों का संग्रह किया था. |
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