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गद्दाफ़ी अरब नेताओं पर बरसे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लीबिया के नेता मुअम्मार गद्दाफ़ी ने अरब देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे एक-दूसरे के ख़िलाफ़ अभियान चलाने से बचें और आपसी एकता पर ध्यान दें. सीरिया की राजधानी दमिश्क में अरब लीग के सालाना सम्मेलन को संबोधित करते हुए गद्दाफ़ी ने अरब देशों के नेताओं पर आरोप लगाया कि वे एक-दूसरे से घृणा करते हैं और ख़ुफ़िया अभियान चलाते हैं. उन्होंने अमरीका समर्थक अरब देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें भी सत्ता से बाहर किया जा सकता है जैसा कि कभी अमरीका के समर्थक सद्दाम हुसैन के साथ हुआ. लीबियाई नेता ने अरब देशों से ईरान के साथ संबंध सुधारने की अपील की और कहा कि इस पड़ोसी मुस्लिम देश का विरोध उनके हित में नहीं है. सम्मेलन में कई अरब देशों के नेताओं के नहीं आने से क्षेत्रीय दरार के संकेत मिल रहे हैं. मिस्र, सउदी अरब और जॉर्डन जैसे देशों ने दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के हिसाब से निचले दर्जे का प्रतिनिधिमंडल भेजा है. लेबनान में मौजूदा राजनीतिक संकट के लिए ये देश सीरिया को ज़वाबदेह मानते हैं. लेबनान सरकार तो इस सम्मेलन से पूरी तरह दूर है. सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुल्लालम ने आरोप लगाया है कि अपने सहयोगियों से इस सम्मेलन से दूर रहने की अपील करके अमरीका अरब देशों को बाँटने की कोशिश कर रहा है. लेबनानी प्रधानमंत्री फ़ाउद सेनिओरा ने अपने देश में आम सहमति से राष्ट्रपति के चुनाव में बाधा डालने के लिए सीरिया की आलोचना की है. लेकिन सेनिओरा ने सीरिया से 'स्वस्थ और भाईचारा का संबंध' रखने की इच्छा भी जताई और संबंध सुधारने में अरब देशों से मदद करने की अपील की. सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद ने कहा कि उनका देश लेबनान के राजनीतिक संकट के समाधान के लिए 'अरब या ग़ैर-अरब प्रयासों' में शामिल होने को तैयार है लेकिन यह सब लेबनान में राष्ट्रीय आम सहमति के आधार पर होना चाहिए. आपसी खींचतान दमिश्क से बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता काट्या एडलर का कहना है कि यह सम्मेलन की डगमगाती शुरुआत है. सीरिया ने इस सम्मेलन को क्षेत्रीय एकता के लिए एक सुनहरे मौक़े के रूप में पेश किया था लेकिन उसका कोई बड़ा संकेत नहीं मिल पा रहा है.
हमारे संवाददाता का कहना है कि मिस्र, सउदी अरब, जॉर्डन और लेबनान के नेता अपने-अपने देशों में हैं क्योंकि उनकी नज़र में मेज़बान सीरिया परेशानियाँ पैदा करने वाला देश है. सीरिया को ये देश न सिर्फ़ ईरान के बहुत क़रीब मानते हैं बल्कि विभाजित लेबनान में एक विनाशक ताक़त के रूप में देखते हैं. सीरिया ने पुराने दिनों में इन देशों पर अमरीकी इशारों पर काम करने का आरोप भी लगाया था. सीरियाई विदेश मंत्री मुल्लालम ने कहा, "उन्होंने (अमरीका) सम्मेलन को रोकने की तमाम कोशिशें की लेकिन नाकामयाब रहे." मुल्लालम ने कहा, "अरब जगत को बाँटना उनका मक़सद है." उन्होंने वादा किया, "सम्मेलन के काम या एजेंडा में अमरीका का कोई नामोनिशान नहीं होगा." काहिरा के अल-अहराम राजनीतिक-रणनीतिक अध्ययन केंद्र के वाहिद अब्देल मेक़ेड ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "अब दो धुरियाँ दिख रही हैं. ईरान, सीरिया, हमास और हिज़बुल्ला एक तरफ़ हैं जबकि बाक़ी दूसरी तरफ़." मेक़ेड कहती हैं, "सीरियाई धुरी में तालमेल है, उनका मक़सद स्पष्ट है और वे संगठित रूप से काम कर रहे हैं." |
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