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युद्धविराम की ज़मीनी सच्चाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में युद्धविराम के बाद की ज़मीनी स्थिति बड़ी ही गड्डमड्ड है. दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना जिन इलाक़ों में आगे बढ़ी है, हो सकता है वहाँ बड़ी संख्या में हिज़्बुल्ला चरमपंथी अब भी मौज़ूद हों. ऐसे में उनके बीच आगे भी झड़पें होने की आशंका देखी जा सकती है. इसराइली विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क रेगेव ने कहा भी है कि उनका देश युद्धविराम का पालन करेगा, लेकिन हिज़्बुल्ला ने कोई हमला किया तो उसे मुँहतोड़ जवाब भी दिया जाएगा. उन्होंने कहा, ''हम इस शांति प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए जो भी संभव होगा, करेंगे. युद्धविराम की व्यवस्था के तहत हम अपने दायित्वों का पालन करेंगे. लेकिन, दुर्भाग्य से, हिज़बुल्ला ने हिंसा की, तो निश्चय ही हम उसका जवाब देंगे.'' इन परिस्थितियों में अगर पूरी शांति प्रक्रिया को पटरी से उतरने से बचाना है, तो संयुक्त राष्ट्र को अपने मौजूदा बल यूनीफ़िल को मज़बूत बनाने और लेबनान की सेना की तैनाती में सहायता देने के लिए तेज़ी से कार्रवाई करनी होगी. जैसे ही ये तैनाती शुरू होती है, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1701 के अनुसार दक्षिणी लेबनान से इसराइली सेना की वापसी भी शुरू हो जानी चाहिए. तालमेल ज़ाहिर तौर पर मामला थोड़ा जटिल है, और इसके लिए तीनों पक्षों यानी संयुक्त राष्ट्र बल यूनीफ़िल, लेबनान की सेना और इसराइल की सेना के बीच पूरे तालमेल की ज़रूरत होगी. यदि सब कुछ सुचारू रूप से चला, यानी युद्धविराम का कोई गंभीर उल्लंघन नहीं हुआ, तो भी सब कुछ व्यवस्थित होने में 10 दिन तो लग ही जाएँगे. उधर देखा जाए तो लेबनान की राजनीतिक स्थिति भी कोई बेहतर नहीं है. अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या हिज़्बुल्ला अपने लड़ाकों को लितानी नदी के दक्षिणी इलाक़े से बाहर निकालने के लिए तैयार है. और ये तो तय है कि हिज़्बुल्ला के निकले बिना लेबनान की सरकार वहाँ सैनिकों की तैनाती करने से पहले दो बार सोचेगी. कुल मिला कर आने वाले कुछ दिन, या फिर कुछ सप्ताह, बहुत ही कठिन होंगे. पूरी संभावना है कि इसराइल दक्षिणी लेबनान के ऊँचाई वाले, रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हिस्सों में अपनी सैनिक उपस्थिति को मज़बूत बनाएगा. संभव है, वो वहाँ रिज़र्व सैनिकों की जगह नियमित सैनिकों को तैनात करना चाहे. हालाँकि इसराइली सैनिक कमांडर और नेता, दक्षिणी लेबनान में लंबी अवधि तक बने रहने के ख़तरे के बारे में भलीभाँति जानते हैं. वे जल्दी-से-जल्दी वापस लौटना चाहेंगे. लेकिन ज़रूरी नहीं कि ये सब उनके तय कार्यक्रम के अनुसार ही हो. |
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