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इसराइली सेना का शहर पर क़ब्ज़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सेना ने रात में सीमा पार करके लेबनान के दक्षिणी हिस्से में मरजायौन शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया है. इसराइली सेना ने ताज़ा हमला इसराइली कैबिनेट के इस फ़ैसले के कुछ ही देर बाद शुरू कर दिया जिसमें इसराइल के और ज़्यादा सैनिक लेबनान के भीतर भेजने की बात कही गई थी. इसराइल का कहना है कि लेबनान में हिज़्बुल्ला के लड़ाकों को बाहर निकालने के लिए यह ताज़ा हमला किया जा रहा है. हालाँकि इसराइल ने ज़ोर देकर यह कहा है कि यह नए बड़े ज़मीनी हमले की शुरुआत नहीं है. सेना का कहना है कि हिज़्बुल्ला के रॉकेट हमलों को रोकने के लिए ज़मीनी हमला शुरु किया गया है और इसके ज़रिए खियाम शहर से हिज़्बुल्ला को हटाया जाएगा ताकि वो इसराइल में रॉकेट न दाग सकें. इससे पहले इसराइली सरकार ने लेबनान में थल सेना की कार्रवाई को और तेज़ करने की योजना को अनुमति दे दी थी. इस अभियान के तहत इसराइल का लक्ष्य लेबनान में लितानी नदी तक पहुंचना है जो कि इसराइली सीमा से 30 किलोमीटर दूर है. इसके लिए 30 हज़ार से अधिक सैनिकों की ज़रुरत पड़ने वाली है. सुरक्षा कैबिनेट की छह घंटे तक चली बैठक में यह निर्णय लिया गया. नौ सदस्यीय कैबिनेट में छह सदस्यों ने इसका समर्थन किया जबकि तीन सदस्य मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे. एक मंत्री ने चेतावनी दी है कि इस अभियान में एक महीने से अधिक समय लग सकता है. इसराइल का यह भी कहना है कि अभी तक सेना ने लेबनान में कुछ ही किलोमीटर तक प्रवेश किया है और खुद को रोके रखा है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर इसराइली सेना लेबनान के अंदर और आगे बढ़ती है तो मरने वालों की संख्या बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी. हमले जारी उधर इसराइल ने लेबनान के बाक़ी हिस्सों पर भी हमले जारी रखे हैं.
बुधवार को इसराइल ने लेबनान के पूर्वी इलाक़ों में हवाई हमले किए जिनमें कम से कम पाँच लोग मारे गए हैं. इसराइली सेना ने पुष्टि की है कि लड़ाई में बुधवार को उसके 15 सैनिक मारे गए और मौजूदा लड़ाई शुरू होने के बाद किसी एक दिन में मारे गए इसराइली सैनिकों की यह सबसे ज़्यादा संख्या है. लेबनान में सबसे बड़े फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर को भी निशाना बनाया गया है. इसराइली सेना का कहना है कि उसने ये हमले बेका घाटी में उन ठिकानों पर किए हैं जहाँ हिज़्बुल्ला के कुछ पदाधिकारियों के घर होने की आशंका है. इससे पहले इसराइली विमानों ने ग़ज़ीयेह गाँव में भी हमले किए जिनमें अनेक लोग हताहत हुए हैं. सीमा के निकटवर्ती इलाक़ों में इसराइली सैनिकों और हिज़्बुल्ला के लड़ाकों के बीच लड़ाई हुई है. कुछ समय इसके काफ़ी भीषण होने की बात कही गई है. उससे पहले मंगलवार को हिज़्बुल्ला ने लगभग 160 रॉकेट इसराइली इलाक़ों की तरफ़ दागे. इसराइली सेना ने लेबनान के आइन अल हिलवेह में सबसे बड़े फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर को भी निशाना बनाया है. यह शिविर लेबनान के बंदरगाह शहर सिडोन के पास स्थित है. कूटनीति उधर संयुक्त राष्ट्र में अनेक राजनयिकों का कहना है कि लेबनान पर इसराइली हमलों को रोकने और शांति का आहवान करने वाले प्रस्ताव पर जल्दी मतदान होने की संभावना कम नज़र आ रही है.
अमरीका और फ्रांस अब इस पर बातचीत कर रहे हैं कि अरब लीग के अनुरोध के बाद प्रस्ताव के मसौदे में कितना फेरबदल किया जाए. अरब लीग ने प्रस्ताव के मसौदे में ठोस फेरबदल करने की माँग की थी. अरब लीग के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद हाथ पर हाथ धरे हुए बैठी है जिससे लेबनान में आम लोगों की ज़िंदगी ख़तरे में पड़ी हुई है. संयुक्त राष्ट्र में बीबीसी संवाददाता जेम्स रॉबिन का कहना है कि सुरक्षा परिषद को प्रस्ताव के मसौदे पर अरब लीग की आपत्तियों को कान देना ही था लेकिन अब अमरीका और फ्रांस के सामने फिर से व्यापक बातचीत की चुनौती आन पड़ी है. इस प्रस्ताव को तैयार करने वालों के रूप में अमरीका और फ्रांस को ही सबसे पहले किसी फेरबदल पर आपस में राज़ी होना होगा जोकि पहले से ही काफ़ी मुश्किल नज़र आता है. अमरीका और फ्रांस दोनों ही इस बात पर तो राज़ी हैं कि लेबनान ने दक्षिणी हिस्सों में जो अपने 15 हज़ार सैनिक तैनात करने की पेशकश की है उसे भी प्रस्ताव में शामिल किया जाए लेकिन मतभेद इस पर हैं कि क्या भाषा इस्तेमाल की जाए. फ्रांस का कहना है कि ऐसी भाषा इस्तेमाल की जाए जिसमें इसराइली सेना की लेबनान के इलाक़ों से तीव्र वापसी सुनिश्चित हो लेकिन अमरीकी ऐसा नहीं चाहते हैं. इसलिए कोई सहमति बनाने में ख़ासा समय लग सकता है. |
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