|
'केमिकल अली' की सज़ा-ए-मौत मंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के सहयोगी रहे हसन अल माजिद उर्फ़ केमिकल अली को साल 2007 में सुनाई गई सज़ा-ए-मौत को इराक़ी राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ़ से मंज़ूर कर दी गई है. केमिकल अली सद्दाम हुसैन के चचेरे भाई भी हैं और वह सद्दाम शासन के दौरान महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे. उन पर आरोप है कि उन्होंने 1988 में उत्तरी इराक़ में कुर्दों के ख़िलाफ़ चलाए गए तथाकथित सरकारी अभियान के दौरान लगभग एक लाख कुर्दों को मार दिया था जिसके लिए माजिद पर नरसंहार का मुक़दमा चला है. केमिकल अली को इस मुक़दमे के बाद जून 2007 में मौत की सज़ा सुनाई गई थी लेकिन कुछ क़ानूनी जटिलताओं की वजह से यह इस सज़ा पर अमल नहीं हो सका था. फाँसी की सज़ा को इराक़ी राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ़ से दो दिन पहले मंज़ूरी मिल गई है और इस मंज़ूरी के तीस दिन के अंदर उन्हें फाँसी दी जानी है. इराक़ी राष्ट्रपति कार्यालय में राष्ट्रपति जलाल तालाबानी और दो उपराष्ट्रपति शामिल हैं. केमिकल अली के अलावा सद्दाम हुसैन शासन के दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों हुसैन राशिद अल तिकरिती और सुल्दाम हाशिम को भी दोषी पाया गया है. हुसैन राशिद अल तिकरिती सद्दाम शासन के दौरान वरिष्ठ सैनिक कमांडर थे और सुल्तान हाशिम रक्षा मंत्री रह चुके हैं. राजधानी बग़दाद में बीबीसी संवाददाता जिम मुईर का कहना है कि राष्ट्रपति कार्यालय ने अभी हुसैन राशिद अल तिकरिती और सुल्तान हाशिम की सज़ाए मौत को मंज़ूरी नहीं दी है और अभी ये दोनों लोग कुछ समय तक इसी अनिश्चितता की स्थिति में रहेंगे कि उन्हें फाँसी दी जाएगी या नहीं. ज़हरीली गैस ये तीनों लोग यानी हसन अल माजिद उर्फ़ केमिकल अली हुसैन राशिद अल तिकरिती और सुल्तान हाशिम अभी अमरीकी सेनाओं की हिरासत में हैं और प्रावधानों के अनुसार उन्हें अक्तूबर 2007 तक फाँसी दे दी जानी चाहिए थी लेकिन हाशिम ने सुन्नी राजनेताओं के बीच कुछ लोकप्रियता हासिल कर ली थी जिसकी वजह से इसमें देरी हुई.
इराक़ी उपराष्ट्रपति तारिक़ अल हाशमी देश के प्रमुख सुन्नी नेताओं में से एक हैं और उनका कहना रहा है कि सुल्तान हाशिम सिर्फ़ एक ऐसे सैन्य कर्मचारी रहे हैं जिन्होंने सरकारी आदेशों का पालन करते हुए अपनी ड्यूटी निभाई और उनकी सज़ा माफ़ कर दी जानी चाहिए. इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी प्रशासन ने अमरीकी दूतावास से माँग की है कि इन तीनों नेताओं को सरकार को सौंप दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें फाँसी पर लटकाया जा सके. इससे पहले अमरीकी सेनाएँ पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन और उनके सौतेले भाई बरज़ान अली तिकरिती सहित अनेक नेताओं को इराक़ सरकार को सौंप चुकी है और उनमें से सद्दाम हुसैन सहित अनेक नेताओं को इराक़ सरकार फाँसी भी दे चुकी है और कोई ख़ास राजनीतिक उथल-पुथल नहीं हुई. सद्दाम हुसैन सरकार का दावा था कि कुर्दों के ख़िलाफ़ 1988 में चलाया गया अनफ़ल अभियान विद्रोही गतिविधियों के ख़िलाफ़ एक स्वभाविक सरकारी कार्रवाई थी. उस समय इराक़-ईरान युद्ध भी चल रहा था. हसन अल माजिद को कैमिकल अली नाम इसलिए दिया गया क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने कुर्दों के ख़िलाफ़ अनफ़ल अभियान के दौरान ज़हरीली गैसों का इस्तेमाल किया था. अनफ़ल अभियान पर चले मुक़दमे की सुनवाई के दौरान हसन अल माजिद ने कुर्दों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के आदेश देने के बारे में कहा था, "मैं वो आदमी हूँ जिसने सेना को आदेश दिया कि वह कुछ गाँवों को नष्ट कर दे और ग्रामीणों को वहाँ से हटा दे. मुझे इसका कोई अफ़सोस नहीं है और मैंने कोई ग़लती नहीं की." |
इससे जुड़ी ख़बरें सद्दाम की बरसी पर इराक़ में सुरक्षा कड़ी30 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना सद्दाम के सहयोगी रमादान को फाँसी20 मार्च, 2007 | पहला पन्ना इराक़ी प्रधानमंत्री ने की अमरीका की निंदा12 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना कौन हैं केमिकल अली?24 जून, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में विद्रोहियों के साथ बातचीत21 मार्च, 2007 | पहला पन्ना हाशिमी विद्रोहियों से वार्ता के पक्ष में20 मार्च, 2007 | पहला पन्ना फाँसी दिए जाने की व्यापक निंदा16 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई को फाँसी15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||