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सद्दाम की बरसी पर इराक़ में सुरक्षा कड़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को फाँसी लगाए जाने की पहली बरसी के मौके पर इराक़ में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. माना जा रहा है कि सद्दाम हुसैन के समर्थक तिकरित शहर और उसके पास बनी सद्दाम की कब्र के पास जमा होंगे. आंतरिक मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल करीम ने कहा, ऐसे लोग थे जो सद्दाम का समर्थन करते थे और उनमें से कई लोग आज भी हैं. लेकिन अगर हमें लगेगा कोई आपराधिक काम हो रहा है तो उसे विफल करने की हमने पूरी तैयारी कर रखी है. 150 शियाओं के क़त्ल के इलज़ाम में सद्दाम हुसैन को पिछले साल 30 दिसंबर को फाँसी लगा दी गई थी. फाँसी सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के कई दृश्य मोबाइल फ़ोन पर क़ैद कर लिए गए थे और दुनिया भर के लोगों ने इसे देखा था. इसमें दिखाया गया था कि फाँसी लगाए जाने से पहले कुछ लोग सद्दाम हुसैन को चिढ़ा रहे हैं. इसके चलते इराक़ सरकार की किरकिरी हुई थी. बाद में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को फाँसी दिए जाने के तरीके की आलोचना करनी पड़ी थी. सु्न्नियों के नेता 69 वर्षीय सद्दाम हुसैन के मारे जाने के बाद से शियाओं के साथ संघर्ष और बढ़ गया है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इराक़ी अधिकारियों का मानना है कि सद्दाम हुसैन की हत्या के बाद उनके समर्थकों की ये उम्मीद ख़त्म हो गई कि वे कभी सत्ता में लौट सकेंगे. इससे सु्न्नी समुदाय के कई लोग संघर्ष का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो गए. सद्दाम के शासनकाल के समय के कई सदस्यों को फाँसी सुनाई जा चुकी है जिसमें केमिकल अली के नाम से मशहूर अली हसन भी शामिल है. |
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