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ऐसा सद्दाम, जिसे आप नहीं जानते | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सद्दाम हुसैन की देखभाल करने वाले एक अमरीकी नर्स ने उनका एक अलग रूप देखा था. ऐसा सद्दाम हुसैन जो पौधों को पानी देता था और पक्षियों को खाना खिलाता था. ऐसा सद्दाम हुसैन जिसे यह भी याद था कि वह एक किसान की पृष्ठभूमि से आया था, ऐसा सद्दाम हुसैन जिसे अपने बच्चों के साथ गुज़ारे एक-एक पल याद थे. सद्दाम हुसैन पौधों को पानी देते थे और सिगार पीने के साथ-साथ कॉफ़ी की चुस्कियाँ भी लेते थे ताकि उनका रक्तचाप ठीक रहे. सद्दाम हुसैन को फाँसी पर लटकाए जाने के बाद उनकी देखभाल करने वाले एक अमरीकी सैनिक नर्स ने उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को उजागर किया है. एक अमरीकी अख़बार को दिए इंटरव्यू में मास्टर सार्जेंट रॉबर्ट इलिस ने बताया कि अपने जीनव के आख़िरी वर्षों में सद्दाम हुसैन क्या-क्या करते थे. इलिस ने वर्ष 2004 और 2005 में बग़दाद के निकट एक कैंप में सद्दाम हुसैन की देखभाल की थी. इलिस का कहना है कि सद्दाम ने उस दौरान किसी चीज़ के लिए शिकायत नहीं की थी. निर्देश उन्होंने बताया कि उन्हें सद्दाम हुसैन को किसी भी तरह जीवित रखने का निर्देश मिला था. एक अमरीकी कर्नल ने इलिस ने कहा था- सद्दाम हुसैन अमरीकी हिरासत में नहीं मर सकते.
सेंट लुई के रहने वाले रॉबर्ट इलिस ने अख़बार को बताया कि उस दौरान सद्दाम हुसैन को 6x8 फ़ीट के एक सेल में रखा गया था. जहाँ एक बेड, एक टेबल, दो प्लास्टिक की कुर्सियाँ और दो वॉश बेसिन थे. सद्दाम हुसैन अपने खाने में से ब्रेड बचाकर रखते थे और जब भी उन्हें बाहर निकलने दिया जाता था, वे उसे पक्षियों को खिलाते थे. सद्दाम हुसैन पौधों में पानी भी दिया करते थे. इलिस बताते हैं- सद्दाम हुसैन कहते थे वे पहले एक किसान थे और वे इसे कभी नहीं भूलते कि वे कहाँ से आए हैं. इलिस ने बताया कि सद्दाम हुसैन ने कभी उन्हें परेशान नहीं किया और वे शिकायत भी कम ही करते थे. उन्होंने यह भी बताया कि सद्दाम में सहन करने की ज़बरदस्त क्षमता थी. इलिस ने यह भी जानकारी दी कि कैसे सद्दाम हुसैन अपने जीवन के उन पलों को याद करते थे जब वे अपने बच्चों को सुलाने के लिए कहानियाँ सुनाया करते थे. सद्दाम को वो घटना भी याद थी जब पेट दर्द से परेशान अपनी बेटी को उन्होंने दवा दी थी. लेकिन सद्दाम हुसैन ने कभी अपने दोनों बेटों उदै और क़ुसै की चर्चा नहीं की जो 2003 में मारे गए थे. इलिस के मुताबिक़ सद्दाम हुसैन ने कभी मौत के बारे में भी चर्चा नहीं की और ना ही उन्हें अपने शासनकाल के बारे में कोई खेद था. सद्दाम हमेशा यही कहते थे कि उन्होंने जो किया इराक़ के लिए ही किया. एक बार तो सद्दाम हुसैन ने रॉबर्ट इलिस से ही पूछ लिया कि जब इराक़ में क़ानून निष्पक्ष था और विनाश के हथियार भी नहीं मिले थे, तो अमरीका ने इराक़ पर हमला क्यों किया. इलिस दिन में दो बार सद्दाम हुसैन की जाँच करते थे. इलिस कहते हैं कि सद्दाम हुसैन ने हमेशा उनका सम्मान किया. जब अपने भाई की तबीयत गंभीर होने के कारण इलिस को वहाँ से जाना पड़ा, तो रवाना होने से पहले सद्दाम हुसैन ने इलिस को गले से लगाया और कहा कि वे उनके भाई बनेंगे. दुजैल नरसंहार मामले में दोषी ठहराने के बाद इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को शनिवार को फाँसी पर लटका दिया गया. |
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