|
इराक़ में कई बम धमाके, 70 की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को बग़दाद में फाँसी दिए जाने के कुछ ही घंटे बाद अलग-अलग जगहों पर हिंसा हुई है जिसमें कम से कम 70 लोग मारे गए हैं. सबसे पहले दक्षिणी इराक़ के शिया बाहुल्य शहर कुफ़ा में एक कार बम धमाका हुआ जिसमें 31 लोग मारे गए हैं और 45 से अधिक लोग घायल हुए हैं. कुफ़ा इलाक़े के अस्पताल के अधिकारियों ने 31 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. इसके कुछ ही समय बाद राजधानी बग़दाद के हुर्रिया इलाके में कुछ जगहों पर सुनियोजित ढंग से किए गए बम विस्फोटों में कम से कम 37 लोगों की मौत हो गई है. राजधानी के हुर्रिया इलाके में भी शिया समुदाय के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं. हिंसा की घटनाएँ कुफ़ा शहर जो बम धमाका हुआ वह भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में हुआ. कुफ़ा शिया मुसलमानों का एक तीर्थ स्थल है. उस समय ईद अल-अधा के मौक़े पर छुट्टी के कारण अनेक लोग बाज़ार में ख़रीददारी कर रहे थे और कई महिलाएँ और बच्चे इस विस्फोट की चपेट में आ गए. उधर एक अन्य घटना में अमरीकी सैनिकों के एक दल ने उत्तर-पश्चिमी इराक़ में चार संदिग्ध विद्रोहियों को मार गिराया है. प्राप्त जानकारियों के अनुसार अमरीकी सैनिकों ने थार थार इलाके में एक जगह पर छापा मारकर इन कथित विद्रोहियों को मार दिया है. बताया जा रहा है कि जो विद्रोही मारे गए हैं वो हथियारों से लैस थे और जिस इमारत में वे छिपे हुए थे वहाँ से सेना ने कई हथियार बरामद किए हैं. इसके अलावा अमरीकी सेना ने बताया है कि इराक़ में हिंसा की घटनाओं में शनिवार को छह अमरीकी सैनिक मारे गए हैं. इस तरह केवल इसी वर्ष दिसंबर में इराक़ में मारे गए अमरीकी सैनिकों की तादाद 109 हो गई है जो कि पिछले दो वर्षों के दौरान किसी एक महीने में मारे गए अमरीकी सैनिकों की सबसे बड़ी तादाद है. सतर्कता पूरे इराक़ में अमरीकी सैनिकों और इराक़ी सुरक्षाकर्मियों को सतर्कता बरतने को कहा गया है क्योंकि कई जगह पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी अपने सभी दूतावासों को सतर्क रहने की चेतावनी दी थी. माना जा रहा था कि सद्दाम को फाँसी दिए जाने पर देशभर में हिंसा की घटनाएँ बढ़ सकती हैं और इससे निपटने के लिए ख़ास इंतज़ाम किए गए थे. इराक़ पिछले कुछ महीनों से हिंसा के दौर को झेल रहा है. वहाँ शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों के बीच चल रही हिंसा इराक़ और अमरीकी सेना के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. |
इससे जुड़ी ख़बरें सद्दाम को फाँसी: बीबीसी विशेष कवरेज़30 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन को 30 दिन के भीतर फाँसी26 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन: बिना पटकथा का शो-मैन05 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन: ज़िंदगी का सफ़र05 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||