BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 27 फ़रवरी, 2008 को 12:17 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
जैव ईंधन की मदद से उड़ान भरी
हवाई जहाज़
एमस्टर्डम एयरपोर्ट से जल्द ही जैव ईंधन की मदद से विमान उड़ान भरेगा
हो सकता है कि जल्द ही पेड़ों और फ़सलों से मिलने वाले जैव ईंधन की मदद से आप हवाई सफ़र कर सकेंगे. ऐसा ही एक विमान लंदन से एम्सटर्डम के लिए रवाना हो चुका है.

ये पहला मौका है जब पेड़-पौधों से मिलने वाली ऊर्जा यानी जैव ईंधन के सहारे किसी हवाई जहाज़ ने व्यवसायिक उड़ान भरी है. हालांकि इसमें आंशिक रूप से ही जैव ईंधन का इस्तेमाल किया गया है.

विमान के चार में से एक इंजन में फ़सलों से तैयार किया गया ईंधन इस्तेमाल किया गया है.

लेकिन, वर्जिन एटलांटिक एयरलाइंस की इस उड़ान में एक भी यात्री नहीं है.

सावधानी के मद्देनज़र इस बोईंग 747 विमान के चार इंजनों में से एक पर ही जैव ईंधन की सप्लाई रखी गई है जो पूरे वक्त जैव ईंधन से भरे तेल के टैंक से जुड़ा रहेगा.

ऐसा इसलिए ताकि किसी भी तरह की मुश्किल आने पर तीन इंजनों की मदद से हवाई जहाज़ को काबू किया जा सके.

कुछ परेशानियां भी हैं

पर्यावरण के जानकार इस तरह से हवाई जहाज़ में जैव ईंधन का इस्तेमाल करने का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि जैव ईंधन के इस्तेमाल से बेतहाशा जंगल कटेंगे.

लेकिन, अपनी फ्लाइट में जैव ईंधन का इस्तेमाल करने वाली 'वर्जिन एटलांटिक एयरलाइंस' की ये अभी तक साफ़ नहीं किया है कि ये किस तरह का जैव ईंधन होगा.

 प्रदूषण कम करने के लिए ज़रूरी है कि बेतहाशा बढ़ रहीं विमानन कंपनियों को बढ़ने से रोका जाए, क्योंकि पर्यावरण में सबसे ज़्यादा ग्रीन हाउस प्रभाव विमानों के ईंधन से ही बढ़ रहा है.
केनिथ रिचटर, पर्यावरणविद

इस प्रयोग में सबसे बड़ी परेशानी ये है कि जैव ईंधन उड़ान के दौरान ज़्यादा ऊंचाई पर कम ताप होने पर जम सकता है.

जैव ईंधन की मदद से जहाज़ उड़ाने के मामले में विमान बनाने वाली कंपनी 'बोईंग' और ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कंपनी 'जीई' शोध कर रही हैं.

वर्जिन एयरलाइंस का मानना है कि आने वाले दस सालों में विमान पूरी तरह जैव ईंधन पर उड़ सकेंगे.

क्या ये चाल है

पर्यावरण मामलों के जानकार और जैव ईंधन का ज़ोर-शोर से प्रचार करने वाले केनिथ रिचटर का कहना है, "ये सब एक सोची-समझी चाल है. ये सारा कुछ मौसम में हो रहे बदलाव की तरफ़ से ध्यान बंटाने के लिए किया जा रहा है."

 ये सब एक सोची-समझी चाल है. ये सारा कुछ मौसम में हो रहे बदलाव की तरफ़ से ध्यान बंटाने के लिए किया जा रहा है.
केनिथ रिचटर, पर्यावरणविद

रिचटर कहते हैं, "वैज्ञानिक शोध से ये साबित हो चुका है कि जैव ईंधन भी उत्सर्जन करने में ज़्यादा कारगर साबित नहीं हुए हैं. ज़्यादा से ज़्यादा जैव ईंधन वाले पेड़ों को लगाने से खाद्य पदार्थों की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी क्योंकि लोग इन्हें ज़्यादा लगाएंगे."

रिचटर का मानना है, "प्रदूषण कम करने के लिए ज़रूरी है कि बेतहाशा बढ़ रहीं विमानन कंपनियों को बढ़ने से रोका जाए, क्योंकि पर्यावरण में सबसे ज़्यादा ग्रीन हाउस प्रभाव विमानों के ईंधन से ही बढ़ रहा है."

रिचटर के मुताबिक ब्रिटेन में इस तरह की कंपनियों को दी जा रही सब्सिडी पर भी रोक लगाई जानी चाहिए.

जबकि, वर्जिन एटलांटिक एयरलाइंस के पाउल चार्ल्स का कहना है, "अगर कुछ लोग वातावरण में कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए. ये कोई चाल नहीं है."

चार्ल्स ने कहा कि इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए.

फ़ाइल फ़ोटोघासफूस से बनेगा ईंधन!
एक नोबेल विजेता के अनुसार ईंधन ज़रूरत घास-फूस से पूरी हो सकेगी.
एस्प्रिन'कैंसर रोके एस्प्रिन'
एक शोध में पाया गया है कि एस्प्रिन कैंसर को बढ़ने से रोकने में मदद करती है.
चकित हो गए वैज्ञानिक
एक द्वीप पर मिली पचास से अधिक अजनबी क़िस्में मछलियों और प्रवालों की.
शार्कलुप्त होते कई जानवर
दरियाई घोड़े और ध्रुवीय भालू भी अब तेज़ी से लुप्त होते जा रहे हैं.
मछलीसमुद्री मछलियाँ ख़त्म?
एक अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक 50 साल में समुद्री मछलियाँ ख़त्म हो जाएँगी.
इससे जुड़ी ख़बरें
'ईंधन की कमी से जन्म दर घटेगी'
13 फ़रवरी, 2004 | विज्ञान
पायलट रहित लड़ाकू विमान
01 जुलाई, 2003 | विज्ञान
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>