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शुक्रवार, 13 फ़रवरी, 2004 को 10:17 GMT तक के समाचार
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'ईंधन की कमी से जन्म दर घटेगी'
बच्चा
ईंधन की कमी से अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा
एक अमरीकी वैज्ञानिक का कहना है कि जैसे जैसे आने वाले दशकों में तेल और गैस का भंडार ख़त्म होगा दुनिया भर में जन्मदर में कमी आ सकती है.

अनुमानों के मुताबिक दुनिया की वर्तमान आबादी 6.3 अरब से बढ़कर 2050 तक 9 अरब तक हो जाएगी.

लेकिन सियाटेल में वर्जीनिया अबरनेती ने कहा कि 'फ़ॉसिल फ़्यूल' यानी कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधनों के ख़त्म होने की अर्थव्यवस्था पर बड़ी तगड़ी मार पड़ने वाली है.

उनका कहना था, ''जब आर्थिक हालत खस्ता होती है तो लोग युवावस्था में शादी नहीं करते और जल्दी-जल्दी बच्चे पैदा नहीं करते.''

वर्जीनिया अबरनेती मानवविज्ञानी और वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफ़ेसर हैं.

ईंधन की भूमिका

अमरीकन एसोसिएशन फ़ॉर एडवांसमेंट ऑफ़ साइंसेस में बोलते हुए उन्होंने कहा, ''जनसंख्या वृद्धि में ईंधन का अहम भूमिका है.''

 इस समय प्रति व्यक्ति ईंधन की ख़पत अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करती है. इसलिए जब ईंधन की उपलब्धता कम हो जाएगी तो इसका अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा और इससे लोगों की प्रजनन क्षमता भी घट जाएगी
प्रोफ़ेसर वर्जीनिया अबरनेती

''इस समय प्रति व्यक्ति ईंधन की ख़पत अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करती है. इसलिए जब ईंधन की उपलब्धता कम हो जाएगी तो इसका अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा और इससे लोगों की प्रजनन क्षमता भी घट जाएगी.''

उनका कहना है कि हाल के दशकों में यह साबित हो गया है कि कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधन की उपलब्धता से ही लोगों का जीवन स्तर तय होता है.

ऐसा नहीं है कि पेट्रोलियम से गाड़ियाँ चलती हैं या गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रुप में हो रहा है. बल्कि कोयले से बिजली बन रही है और पेट्रोलियम उत्पादों से खाद, कीटनाशक जैसे कृषि उत्पाद बन रहे हैं और प्लास्टिक के निर्माण के लिए भी इनकी बहुत आवश्यकता है.

प्रोफ़ेसर अबरनेती का कहना है कि इसका मतलब साफ़ है कि इन ईंधनों का कोई आसान विकल्प उपलब्ध नहीं होगा.

उनका तर्क है कि ईंधन के बिना हमारा कृषि उत्पादन घट जाएगा.

वे कहती हैं, ''उत्पादन घट जाएगा तो खाने पीने के सामान की क़ीमतें बढ़ जाएंगी और इससे अर्थव्यवस्था की हालत और ख़राब हो जाएगी.''

सिद्धांत

प्रोफ़ेसर अबरनेती ने ईंघन पर आधारित अर्थव्यवस्था का अपना सिद्धांत तीस साल पहले प्रतिपादित किया था.

उनके सिद्धांत के अनुसार लोग अपने परिवार तब तक नहीं बढ़ाते जब तक उनको यह भरोसा नहीं हो जाए कि अर्थिक हालत सुधरने के आसार दिख रहे हैं और जब दिखता है कि बच्चों को पाल पोसकर बड़ा करना आसान नहीं होगा आदमी आमतौर पर परिवार नहीं बढ़ाता.

वे कहती हैं, ''अमरीका में 1974 के बाद से ईंधन के दामों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है और अर्थव्यवस्था ढलान पर भी रही और इसका सीधा असर हुआ कि अमरीकी श्वेतों और अश्लेतों की प्रजनन क्षमता घट गई.''

उनका कहना है कि हाल ही में हो रही घटनाक्रम का असर भी साफ़ दिखता है.

वे कहती हैं कि एक आम महिला की औसत उम्र में बच्चों की संख्या का औसत 2.3 है और यह लगातार घट रही है.

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