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ध्रुवीय भालू हो रहे हैं लुप्त | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व भर में जैव विविधता की रक्षा के लिए काम कर रही एक संस्था के अनुसार ध्रुवीय भालू और दरियाई घोड़े भी अब लुप्त हो रहे जानवरों की श्रेणी में आ रहे हैं. ऐसा पहली बार हो रहा है जब ध्रुवीय भालू और दरियाई घोडे़ को लुप्त हो रहे जानवरों की सूची में शामिल किया गया है. वर्ल्ड कंज़रवेशन यूनियन ( आईयूसीएन ) द्वारा जारी रेड लिस्ट ऐसे कई जानवरों और पेड़ पौधों के विवरण हैं जिनके बारे में कहा गया है कि इनकी संख्या लगातार कम हो रही है. सूची में दरियाई घोडे़ और ध्रुवीय भालू के अलावा शार्क को भी शामिल किया गया है. इतना ही नहीं यूरोप और अफ्रीका में स्वच्छ जल में रहने वाली कई मछलियों को भी इस सूची में शामिल किया गया है. आईयूसीएन का कहना है कि जीव जंतुओं को बचाने के लिए बनी हुई समिति के बावजूद ऐसे जानवरों की संख्या बढ़ती जा रही है. आईयूसीएन के प्रबंध निदेशक एचिम स्टेनर कहते हैं कि इस साल की रेड लिस्ट से साफ है कि जैव विविधता में तेज़ी से कमी आ रही है. उनका कहना है कि अगर जैव विविधता में कमी जारी रही तो यह मनुष्यों के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि जानवरों के लुप्त होने का प्रभाव पूरे पर्यावरण पर पड़ता है. इस साल की रेड लिस्ट में जानवरों और पेड़ पौधों की 16, 119 प्रजातियों के नाम है. संगठन के अनुसार जानवरों और पेड़ पौधों के लुप्त होने के लिए जलवायु परिवर्तन को दोषी ठहराया जा सकता है लेकिन इसके साथ ही साथ लोग भी ज़िम्मेदार हैं. सर्वेक्षण से यह बात भी सामने आई है कि जो जानवर पहले से ही लुप्त हो रहे थे उनकी स्थिति और ख़राब है. ध्रुवीय भालू के बारे में सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगले 50 से 100 वर्षों में उनकी संख्या 50 प्रतिशत से 100 प्रतिशत की कमी आएगी. सूची में पहली बार आए दरियाई घोड़ों की संख्या पिछले एक दशक में ही 95 प्रतिशत घटी है. स्थिति सबसे ख़राब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में है जहां दरियाई घोड़ों को मांस के लिए मारा जाता है. आईयूसीएन के प्रमुख वैज्ञानिक जेफरी मैकनिले के अनुसार क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण भी जैव विविधता में कमी आती है. इसी तरह मछलियों की कई प्रजातियों की स्थिति दयनीय है और उनकी संख्या में लगातार कमी आ रही है. रेड लिस्ट में मछलियों की ऐसी 537 प्रजातियों को शामिल किया गया है. आईयूसीएन का कहना है कि शार्कों और मछलियों की कम होती संख्या चिंताजनक है और इसे रोकने के लिए जल्दी क़दम उठाना ज़रुरी है. |
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