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'बढ़ती ईंधन ज़रूरत का जवाब है घास-फूस' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर स्टीफ़न चू ने कहा है कि दुनिया की बढ़ती ईंधन मांग की पूर्ति घास-फूस से तैयार जैव ईंधन से की जा सकती है. 'अमेरिकन एसोसिएशन फ़ॉर एडवांसमेंट ऑफ़ सांइसेज़' की वार्षिक बैठक में प्रोफ़ेसर चू ने कहा कि घास-फूस से जैव ईंधन तैयार किया जा सकता है और इस ईंधन का इस्तेमाल कारों में किया जा सकता है. अमरीकी सरकार का मानना है कि घास-फूस से तैयार जैव-ईंधन से अमरीका में हो रहे कुल ईंधन खपत के एक तिहाई हिस्से की भरपाई की जा सकती है. लेकिन प्रोफ़ेसर चू का कहना है कि अमरीका की ईंधन ज़रूरत को अकेले जैव-ईंधन से पूरा किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि घास-फूस, जैव-ईंधन का आकर्षक स्रोत है, क्योंकि इसे बहुत कम लागत से उगाया जा सकता है. इसके अलावा इसके लिए कृषि भूमि की भी ज़रूरत नहीं होगी. अभी तक कपास, नीम और जटरोफ़ा के बीजों से बायो-डीज़ल बनाए जाने पर ही ज़ोर दिया जा रहा था. भारत समेत अनेक देशों में इसे पेट्रोल और डीजल के बेहतर विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें मोबाइल से गाँवों को जोड़ेगी बायोडीजल08 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान साफ ईंधन की तलाश29 जनवरी, 2003 | विज्ञान 'ईंधन की कमी से जन्म दर घटेगी'13 फ़रवरी, 2004 | विज्ञान लैपटॉप के लिए अल्कोहल ऊर्जा17 मार्च, 2003 | विज्ञान बढ़ते पारे के लिए मानव ज़िम्मेदार02 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान फ्रांस में लगेगा परमाणु फ़्यूज़न बिजलीघर28 जून, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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