BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मित्र को भेजेंकहानी छापें
फ्रांस में लगेगा परमाणु फ़्यूज़न बिजलीघर
परमाणु फ़्यूजन
फ्रांस में लगा इटर परमाणु रिएक्टर
दस अरब यूरो की लागत से बनने वाला परमाणु फ़्यूज़न बिजलीघर फ्रांस में लगने जा रहा है. इस संयंत्र को पाने की होड़ में फ़्रांस ने जापान को पछाड़ दिया है.

प्रयोग के तौर पर बनने वाली इस अणुतापीय भट्टी (इटर) कहाँ बने, इस पर क़रीब डेढ़ साल से विवाद चल रहा था.

इस बिजलीघर को फ्रांस में लगाए जाने के मुद्दे पर छह भागीदारों के बीच मॉस्को में समझौता हो गया है.

परमाणु फ़्यूज़न से वैसी ही उर्जा मिलती है जैसी सूरज से, यानी प्रदुषणमुक्त ऊर्जा. फ़्रांस में बनने वाले इस बिजलीघर की एक और ख़ासियत ये है कि यहाँ ऊर्जा पैदा करने के क्रम में कोई कचरा नहीं तैयार होता.

फ्रांस के दक्षिणी शहर काद्रेश में लगाए जाने वाले इस बिजलीघर के निर्माण में यूरोपीय संघ, अमरीका, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन की भागीदारी है.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के बाद यह सबसे मंहगी संयुक्त परियोजना है.

ब्रिटेन की परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण के निदेशक प्रोफ़ेसर सर क्रिस लेवलिन स्मिथ कहते हैं, "अगर इस बिजलीघर का निर्माण जल्द ही कर लिया गया तो बड़े पैमाने पर प्रदूषण रहित बिजली निर्माण की दिशा में यह एक बड़ा क़दम साबित होगा."

रियायतें

जापान इस बिजलीघर को अपने शहर रोकाशो के पास लगाने के लिए कोशिशें कर रहा था और कुछ रियायतों की शर्त पर पीछे हट गया.

 अगर इस बिजलीघर का निर्माण जल्द ही कर लिया गया तो बड़े पैमाने पर प्रदूषण रहित बिजली निर्माण की दिशा में यह एक बड़ा क़दम साबित होगा
प्रोफ़ेसर सर क्रिस लेवलिन स्मिथ

इस समझौते के तहत इस परियोजना में अनुसंधान करने वालों में 20 प्रतिशत लोग जापान के होंगे जबकि जापान इसके निर्माण में केवल 10 प्रतिशत धन का योगदान देगा. साथ ही इटर से जुड़े कई अनुसंधान केंद्र जापान में लगेंगे जिनकी लागत का आधा ख़र्च यूरोपीय संघ देगा.

फ्रांस के राष्ट्रपति ज्याक शिराक ने फ्रांस का समर्थन करने के लिए यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों और अन्य भागीदारों को धन्यवाद दिया है.

काद्रेश मार्से शहर से 60 किलोमीटर पर स्थित है और 1959 से ही फ्रांस के परमाणु अनुसंधान का केंद्र रहा है. 1959 में फ्रांस के राष्ट्रपति चार्ल्स डिगॉल ने देश के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत की थी.

फ्रांस में नेता इटर परियोजना को पाने से ख़ुश हैं क्योंकि इससे देश में निकट भविष्य में हज़ारों लोगों को रोज़गार भी मिलेगा.

धरती पर तारा

भौतिक शास्त्र की ज़ुबान में कहा जाए तो इटर का निर्माण धरती पर सूरज जैसे तारे का निर्माण करने समान है.

फ़्यूजन
हल्के अणुओं को मिलाकर बनाई जाती है ऊर्जा

फ़्यूज़न रिएक्शन में हाईड्रोजन आइसोटॉप्स ड्यूटेरियम और ट्रीटियम जैसे हल्के अणुओं को साथ मिलाने से परमाणु गैस तैयार होता है जिसके बाद इसके भारी अणु बनाए जाते हैं.

और इस तरह अणुओं को मिलाने के लिए या फ़्यूज़ करने के लिए धरती पर गैस को 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान तक गरम करने की ज़रूरत होती है. यह तापमान सूरज के गर्भ से कई गुना ज़्यादा गर्म होता है.

इस प्रक्रिया से बना एक किलो फ़्यूज़न ईंधन उतनी उर्जा दे सकता है जितनी एक करोड़ किलोग्राम तेल को जलाने से मिलती है.

मगर पर्यावरणवादी इसे लेकर अभी सशंकित हैं और उनका कहना है कि इटर बिजलीघर को काद्रेश में लगाना जोखिम भरा है क्योंकि इस इलाक़े में भूंकंप की आशंका ज़्यादा है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>