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परमाणु फ़्यूज़न परियोजना पर फ़ैसला टला
अंतरराष्ट्रीय परमाणु फ़्यूज़न परियोजना(इटर) से जुड़े देश इस बात पर सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं कि दुनिया के सबसे बड़े परमाणु फ़्यूज़न रिएक्टर को कहाँ स्थापित किया जाए. वाशिंग्टन में हुई मंत्रीस्तरीय बैठक में परियोजना से जुड़े देश इस बात पर विभाजित रहे कि रिएक्टर फ़्रांस में स्थापित किया जाए या जापान में. अमरीका ने फ़्रांस में रिएक्टर स्थापित किए जाने का खुला विरोध किया है. माना जाता है कि अमरीका का यह रवैया इराक़ पर हमले का फ़्रांस द्वारा विरोध किए जाने की प्रतिक्रिया में है. अमरीका, यूरोपीय संघ, जापान, रूस, चीन और दक्षिण कोरिया के मंत्रियों की बैठक के बाद फ़्रांसीसी सरकार के एक दूत ने कहा कि अब इटर परियोजना के बारे में कोई फ़ैसला फ़रवरी से पहले संभव नहीं दिखता. उम्मीद की जा रही थी कि परियोजना से जुड़े देश दो प्रमुख स्थलों में से एक को हरी झंडी दिखाएँगे. इनमें से एक स्थल फ़्रांस का कैडाराख़े है, और दूसरा जापान में रोकासोमुरा.
फ़्रांसीसी स्थल कैडाराख़े में पहले से ही व्यापक अनुसंधान सुविधा उपलब्ध है और इसे यूरोपीय संघ के अलावा रूस और चीन का समर्थन प्राप्त है. लेकिन जापान, दक्षिण कोरिया और अमरीका रोकासोमुरा में रिएक्टर स्थापित किए जाने के पक्ष में हैं. जापान ने अपनी पेशकश को आकर्षक बनाने के लिए कहा है कि यदि रोकासोमुरा को परियोजना स्थल के रूप में चुना गया तो वह अपने दम सारा ख़र्चा जुटाने को तैयार है. महत्वपूर्ण परियोजना विशेषज्ञों के अनुसार जिस देश में इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर(इटर) परियोजना स्थापित की जाएगी उसे परमाणु फ़्यूज़न तकनीक के क्षेत्र में बढ़त मिल जाएगी. परमाणु फ़्यूज़न को भविष्य में अनंत ऊर्जा का स्रोत माना जाता है. यह ऊर्जा प्रदूषणरहित भी होगी. उल्लेखनीय है कि सूर्य की ऊर्जा का स्रोत भी परमाणु फ़्यूज़न ही है. इटर परियोजना को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मैनहट्टन परियोजना के बाद का सबसे बड़ा प्रयास बताया जाता है. उल्लेखनीय है मैनहट्टन परियोजना ने परमाणु बम को जन्म दिया था. |
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