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डॉक्टर हनीफ़ आज पहुँचेंगे बंगलौर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के नाकाम हमलों के सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया में गिरफ़्तार और फिर रिहा हुए डॉक्टर हनीफ़ शनिवार की शाम को बंगलौर के लिए रवाना हो चुके हैं. उन्होंने भारतीय समय के अनुसार शाम कोई आठ बजे थाई एयरवेज़ की उड़ान ली है. बैंकॉक होते हुए वे रविवार की सुबह बंगलौर पहुँच जाएँगे. इससे पहले उनके एक रिश्तेदार ने कहा है कि उनके साथ हिरासत के दौरान 'अच्छा व्यवहार हुआ'. 26 दिन पुलिस हिरासत में रहने के बाद डॉ हनीफ़ को शुक्रवार की शाम को रिहा किया गया था. उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने डॉ हनीफ़ का वीज़ा रद्द कर दिया है और इसके बाद वे जाँच पूरी होने तक ऑस्ट्रेलिया में काम नहीं कर सकते. 'अच्छा व्यवहार' डॉक्टर हनीफ़ के क़रीबी रिश्तेदार इमरान सिद्दीकी ने बीबीसी संवाददाता नादिया परवेज़ के साथ बातचीत में बताया कि उनके साथ पुलिस ने पूछताछ के दौरान अच्छा व्यवहार किया. हनीफ़ की रिहाई के बाद से ही उनके रिश्तेदार इमरान सिद्दीकी उनके साथ हैं. ऑस्ट्रेलिया से फ़ोन पर बातचीत में इमरान ने बताया, "जेल में सभी लोगों ने उनके साथ बहुत नरम बर्ताव किया. जेल के लोग जानने लगे थे कि हनीफ़ बेगुनाह हैं. हनीफ़ को किसी भी पुलिस अधिकारी से कोई शिकायत नहीं है." इमरान ने बताया कि हनीफ़ ने रिहा होने के बाद भारत में अपने घर वालों से भी बात की है. वीज़ा हनीफ़ की रिहाई के बाद ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री ने कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ऑस्ट्रेलिया छोड़ने के लिए आज़ाद हैं लेकिन उन्हें ऑस्ट्रेलिया में काम करने का वीज़ा दोबारा नहीं दिया जाएगा. इमरान ने बताया, "वीज़ा का मामला अभी कोर्ट में चलता रहेगा लेकिन हमें अपनी इच्छा से भारत जाने की इज़ाजत दे दी गई. सरकार हमें देश से निकाल नहीं रही है." इमरान के मुताबिक हनीफ़ की रिहाई के बाद उनके पास दो रास्ते थे या तो वो ऑस्ट्रेलिया रुककर सुनवाई का इंतज़ार करते या भारत चले जाते. ऑस्ट्रेलिया से हनीफ़ के वकील पीटर रूसो ने बताया, "हम ऑस्ट्रेलिया के आव्राजन मंत्री के हनीफ़ को वीज़ा न देने के फ़ैसले से असहमत हैं. इस मामले में ऑस्ट्रेलिया के फ़ेडरल कोर्ट में आठ अगस्त को सुनवाई होगी." पीटर ने बताया कि जब तक ऑस्ट्रेलिया हनीफ़ को बिज़नेस वीज़ा नहीं देता तब तक हनीफ़ ऑस्ट्रेलिया में न तो नौकरी कर सकते हैं और न ही ऑस्ट्रेलिया जा सकते हैं. मामला पिछले महीने ब्रिटेन में हुए नाकाम कार बम धमाकों के सिलसिले में डॉक्टर हनीफ़ को दो जुलाई को उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब वे भारत जाने की तैयारी कर रहे थे.
उनके मामले को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के रुख़ पर भी सवाल उठे थे. दरअसल ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया. डॉक्टर हनीफ़ पर आरोप लगा कि उन्होंने अपना सिम कार्ड अपने एक रिश्तेदार को दिया था, जो कार बम धमाके के सिलसिले में एक अभियुक्त है. वहाँ की एक अदालत ने बाद में उन्हें ज़मानत दे दी थी. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ज़मानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद उनका वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखने का फ़ैसला किया था लेकिन बाद में सरकार ने उनके ख़िलाफ़ मामला वापस लेने का निर्णय किया. | इससे जुड़ी ख़बरें परिवार ने कहा निर्दोष हैं डॉक्टर हनीफ़08 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस हनीफ़ की हिरासत संबंधी अर्ज़ी वापस ली13 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस हनीफ़ पर भारत ने चिंता जताई16 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस हनीफ़ मामले में उच्चायुक्त तलब 17 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'हनीफ़ को समुचित सुविधाएँ दी जाएँ'18 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस हनीफ़ प्रकरण पर भारत ने चिंता जताई19 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'हनीफ़ को ऑस्ट्रेलिया छोड़ने की अनुमति'28 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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