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शनिवार, 28 जुलाई, 2007 को 08:41 GMT तक के समाचार
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'हनीफ़ को ऑस्ट्रेलिया छोड़ने की अनुमति'
डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़
हनीफ़ के ख़िलाफ़ आरोप वापस ले लिए गए हैं
ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि भारतीय मूल के डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ को ऑस्ट्रेलिया से जाने की अनुमति दी जाएगी.

ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री ने कहा है कि डॉक्टर हनीफ़ ऑस्ट्रेलिया छोड़ने के लिए आज़ाद हैं लेकिन साथ ही कहा कि उनका काम करने का वीज़ा दोबारा नहीं दिया जाएगा.

उनका कहना था, राष्ट्रमंडल को इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि डॉक्टर हनीफ़ ऑस्ट्रेलिया छोड़ कर जाएँ.

ब्रिटेन में नाकाम कार बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किए गए डॉक्टर हनीफ़ को पहले ही रिहा किया जा चुका है और उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप वापस ले लिए गए हैं.

डॉक्टर हनीफ़ के वकील ने कहा है कि हनीफ़ शनिवार को भारत जाएँगे.

 वर्क परमिट रद्द होने के बाद, उनके कामकाज पर असर पड़ सकता है. ये बहुत ज़रूरी है कि हनीफ़ का रिकॉर्ड साफ़-सुथरा हो
डॉक्टर हनीफ़ के वकील

वहीं मोहम्मद हनीफ़ के वकीलों का कहना था कि वे चाहते हैं कि हनीफ़ को काम करने का वीज़ा दिया जाए.

चरित्र को लेकर उठे सवाल के बाद उनका वीज़ा रद्द कर दिया गया था.

डॉक्टर हनीफ़ के वकील स्टीफ़न किम ने रॉयटर्स से कहा, "वर्क परमिट रद्द होने के बाद, उनके कामकाज पर असर पड़ सकता है. ये बहुत ज़रूरी है कि हनीफ़ का रिकॉर्ड साफ़-सुथरा हो."

'ग़लती'

शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने मोहम्मद हनीफ़ के ख़िलाफ़ मामला वापस लेने की घोषणा की थी और यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में ग़लती हुई है.

ऑस्ट्रेलियाई लोक अभियोजन विभाग के निदेशक डेमियन बग ने कहा था
कि हनीफ़ के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. उन्होंने माना कि इस मामले में ग़लती हुई है.

ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री केविन एंड्रयूज़ ने 'आतंकवाद' के मामले में गिरफ़्तार भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ के ख़िलाफ़ दिए गए सबूतों की समीक्षा करने की घोषणा की थी.

इसी के बाद उनके ख़िलाफ़ 'आतंकवाद' से जुड़े मामले वापस लेने की घोषणा की गई है.

मामला

डॉक्टर हनीफ़ के समर्थन में प्रदर्शन भी हुए थे

पिछले महीने ब्रिटेन में हुए नाकाम कार बम धमाकों के सिलसिले में डॉक्टर हनीफ़ को दो जुलाई को उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब वे भारत जाने की तैयारी कर रहे थे.

उनके मामले को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के रुख़ पर भी सवाल उठे थे.

दरअसल ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया.

डॉक्टर हनीफ़ पर आरोप लगा कि उन्होंने अपना सिम कार्ड अपने एक रिश्तेदार को दिया था, जो कार बम धमाके के सिलसिले में एक अभियुक्त है.

वहाँ की एक अदालत ने ‘लापरवाही’ के कारण चरमपंथी संगठन का सहयोग देने का मामला मानते हुए उन्हें ज़मानत दे दी थी.

लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ज़मानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद उनका वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखने का फ़ैसला किया था.

पहले ये कहा गया था कि सिम कार्ड उस जलती कार से मिला था, जिससे ग्लासगो हवाई अड्डे की एक इमारत पर टक्कर मारी गई थी. लेकिन उसके बाद ये बात सामने आई कि ये सिम कार्ड लिवरपूल से बरामद हुआ था.

इस तथ्य के सामने आने से हनीफ़ के ख़िलाफ़ मामला कमजोर हो गया और उनके ख़िलाफ़ सबूतों की समीक्षा करने का फ़ैसला लिया गया.

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