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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय डॉक्टर चिंतित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में नाकाम बम हमलों के सिलसिले में डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ की गिरफ़्तारी के बाद ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे भारतीय डॉक्टर चिंतित हैं. ऑस्ट्रेलिया में डॉक्टरों की बहुत कमी है और दूरदराज के क्षेत्रों की चिकित्सा व्यवस्था कमोबेश पूरी तरह से विदेशी डॉक्टरों पर निर्भर है. कमी इस कदर है कि कई डॉक्टरों को दो-तीन साल से छुट्टी तक नहीं मिली है. बंगलौर से प्रशिक्षित डॉक्टर वुदा नगमा ने पिछले दो साल से छुट्टी नहीं ली है और इसकी मुख्य वजह काम के प्रति उनका समर्पण नहीं, बल्कि ज़रूरत है. नगमा 26 साल पहले ऑस्ट्रेलिया आईं थीं और अब सिडनी के बाहरी इलाक़े में निजी प्रैक्टिस करती हैं. डॉक्टरों की कमी आँकड़ों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के अस्पतालों में एक चौथाई डॉक्टर विदेशों में प्रशिक्षित हुए हैं और क्वींसलैंड में आधे डॉक्टर विदेशी हैं जहाँ कि डॉ हनीफ़ काम करते थे. पूरे ऑस्ट्रेलिया में 2143 मेडिकल स्नातक अकेले भारत से ही हैं और इससे अधिक विदेशी डॉक्टर सिर्फ़ ब्रिटेन से ही हैं, जहाँ उनकी संख्या 4664 है. लंदन के नेशनल हेल्थ सर्विस के लिए काम करने के दौरान डॉक्टर हनीफ़ की नज़र जब ब्रितानी मेडिकल जनरल में प्रकाशित एक विज्ञापन पर पड़ी तो उन्होंने इसके लिए आवेदन किया. इसके बाद वह पिछले साल सितंबर में गोल्ड कोस्ट पहुँचे और ऑस्ट्रेलिया के व्यस्ततम आपातकालीन विभाग में काम करना शुरू किया था. डॉ नगमा भी मानती हैं कि हनीफ़ को हिरासत में रखने का असर यहाँ प्रेक्टिस करने की चाहत रखने वाले भारतीय डॉक्टरों पर तो होगा ही. वो कहती हैं, "इसका असर तो होगा ही. ऑस्ट्रेलिया आने से पहले अब वे दो बार सोचेंगे. इससे यहाँ हालात और बिगड़ेंगे, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही डॉक्टरों की किल्लत है." चिंता यूनाइटेड इंडिया एसोसिएशन (यूआईए) और उपमहाद्वीप के डॉक्टरों के दबदबे वाली भारतीय डॉक्टरों की एसोसिएशन ओवरसीज ऑस्ट्रेलियन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन (ओएएमजीए) ने हनीफ़ प्रकरण के बाद एक बयान जारी किया है.
बयान में 'किसी भी तरह के आतंकवाद' की निंदा की गई है और इससे निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया सरकार के किसी भी क़दम का समर्थन किया है. लेकिन बयान में कहा गया है कि सरकार ने मीडिया के ज़रिए भारतीय डॉक्टरों के सवालों और चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया है. बयान में उम्मीद जताई गई है कि डॉ हनीफ़ प्रकरण को इस तरह से सुलझाया जाएगा, जिससे क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई हो और डॉक्टर हनीफ़ के साथ न्याय हो. मामला ग़ौरतलब है कि भारतीय डॉक्टर हनीफ़ को दो जुलाई को उस वक्त हिरासत में ले लिया गया था जब वो ऑस्ट्रेलिया से भारत आने की कोशिश कर रहे थे. डॉक्टर हनीफ़ के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने आरोप तय कर दिए हैं. हालाँकि बाद में उन्हें ज़मानत भी मिल गई लेकिन ज़मानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद डॉक्टर हनीफ़ का वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखे जाने का फ़ैसला किया गया. लंदन और ग्लासगो में विफल हमलों की साजिश रचने के आरोप में कुल आठ संदिग्ध लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी. इनमें से सात संदिग्ध ब्रिटेन में गिरफ़्तार हुए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें हनीफ़ मामला: सरकार पर सवाल21 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना हनीफ़ को हिरासत में रखे जाने का फ़ैसला16 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना सबील और हनीफ़ के ख़िलाफ़ आरोप तय 14 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना हनीफ़ पर आरोप तय, अदालत में पेशी13 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना डॉक्टर हनीफ़ की हिरासत की अवधि बढ़ी09 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना संदिग्ध लोगों में दो भारतीय डॉक्टर03 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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