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हनीफ़ पर भारत ने चिंता जताई
डॉक्टर हनीफ़
ऑस्ट्रेलिया स्थित भारतीय उच्चायुक्त ने हनीफ़ से संपर्क किया है
भारत ने ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत भारतीय मूल के डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ का वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखे जाने पर चिंता जताई है.

ब्रिटेन में विफल बम धमाकों के मामले में मोहम्मद हनीफ़ को दो जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था.

सोमवार को ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने मोहम्मद हनीफ़ को ज़मानत दे दी थी और उन्हें रिहा किया जाना था पर आव्रजन (इमिग्रेशन) मंत्रालय ने उनका वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखने का आदेश दिया.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने मंगलवार को बताया कि भारत सरकार ने डॉक्टर हनीफ़ का वीज़ा रद्द किए जाने और उन्हें हिरासत में रखने पर ऑस्ट्रेलिया सरकार को अपनी चिंता से अवगत कराया है.

हालाँकि प्रवक्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस स्तर पर और किस रूप में ऐसा किया गया है.

प्रवक्ता का कहना था, "हमें आशा है कि डॉक्टर हनीफ़ के साथ ऑस्ट्रेलिया के क़ानून के मुताबिक न्यायपूर्ण और निष्पक्ष बर्ताव किया जाएगा."

उन्होने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायुक्त ने हनीफ़ से संपर्क स्थापित किया है.

 हमें आशा है कि डॉक्टर हनीफ़ के साथ ऑस्ट्रेलिया के क़ानून के मुताबिक न्यायपूर्ण और निष्पक्ष बर्ताव किया जाएगा
नवतेज सरना

नवतेज सरना ने कहा कि उन्हें और उनके परिजनों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है. उन्होने कहा, "डा.हनीफ स्वस्थ हैं."

प्रवक्ता के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्रालय ने हनीफ़ का वीज़ा इस आधार पर रद्द किया है कि उन्होंने चरित्र संबंधी सूचनाओं के ब्योरे में यह बात नही बताई थी कि उनका किसी ऐसे संगठन से संपर्क है जो चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त हो सकता है.

एक दूसरे सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि लंदन में हमले की साजिश में गिरफ़्तार भारतीय मूल के दो युवक सबील और कफ़ील अहमद को अभी तक भारतीय राजनयिकों से संपर्क करने की सुविधा नहीं मुहैया कराई गई है जबकि ऐसा करना सामान्य परिपाटी है.

ज़मानत

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने अपने चचेरे भाइयों सबील और कफ़ील अहमद को मोबाइल फ़ोन के सिम कार्ड उपलब्ध करवाए और एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया.

लेकिन मजिस्ट्रेट ने ‘लापरवाही’ के कारण चरमपंथी संगठन का सहयोग देने का मामला मानते हुए उन्हें ज़मानत दे दी.

न्यायाधीश का कहना था कि अभियोजन पक्ष डॉक्टर हनीफ़ का किसी चरमपंथी संगठन से सीधा संबंध साबित करने में असफल रहा है.

अभियोजन पक्ष ने हनीफ़ की ज़मानत का विरोध किया और उन्हें हिरासत में रखने की वकालत की.

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के आतंकवाद विरोधी क़ानून का हवाला दिया जिसमें विशेष परिस्थितियों में ही ज़मानत देने की व्यवस्था है.

लेकिन हनीफ़ के वकील का कहना था कि उनके ख़िलाफ़ मामला ‘बेहद कमज़ोर’ है. हनीफ़ को 10 हज़ार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की राशि जमा करने पर ज़मानत दी गई थी.

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