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हनीफ़ की पत्नी ने प्रधानमंत्री से अपील की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मोहम्मद हनीफ़ की जल्द वापसी की उम्मीदें कम होने पर उसकी पत्नी फिरदौस ने शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी से अपने पति की मदद करने की अपील की है. दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने भारतीय मूल के डॉक्टर हनीफ़ के ख़िलाफ़ आरोप तय करते हुए कहा है कि उन्होंने लंदन और ग्लासगो में विफल बम हमलों के लिए 'आतंकवादी संगठन को सहयोग' दिया. यदि यह आरोप साबित हो जाता है तो डॉक्टर हनीफ़ को 15 साल तक की सज़ा हो सकती है. फिरदौस ने कहा कि उसके डॉक्टर पति के साथ ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी अन्याय नहीं कर सकते और वो लापरवाही की वजह से अभियुक्त बन गए हैं. ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा है कि डॉक्टर हनीफ़ ने अपने चचेरे भाइयों सबील और कफ़ील अहमद को मोबाइल फ़ोन के सिम कार्ड उपलब्ध करवाए और एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया. पत्रकारों से बातचीत में फिरदौस ने कहा,'' अब तक मैं संयम बनाए थी क्योंकि सोच रही थी कि बिना वजह उनके (हनीफ) ख़िलाफ़ कोई आरोप नहीं लगाए जाएंगे. लेकिन मुझे नहीं पता था कि ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ऐसे क़दम उठाएगी.'' फिरदौस ने कहा,'' मैं प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से मदद की अपील करती हूं क्योंकि सभी जानते हैं कि वो निर्दोष हैं.'' हिरासत ग़ौरतलब है कि भारतीय मूल के डॉक्टर हनीफ़ को उस वक्त हिरासत में ले लिया गया था जब वो ऑस्ट्रेलिया से भारत आने की कोशिश कर रहे थे.
27 वर्षीय डॉक्टर हनीफ़ पिछले सितंबर में ऑस्ट्रेलिया आए थे और यहाँ क्वींसलैंज के गोल्ड कोल्ट अस्पताल में कार्यरत थे. इससे पहले उन्होंने लंदन के नेशनल हेल्थ सर्विस के लिए काम किया था. लंदन और ग्लासगो में विफल हमलों की साजिश रचने के आरोप में कुल आठ संदिग्ध लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी. इनमें से सात संदिग्ध ब्रिटेन में गिरफ़्तार हुए जबकि मोहम्मद हनीफ़ को ऑस्ट्रेलिया में गिरफ़्तार किया गया था. |
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